मनमोहन देसाई स्टेशन के करीब रहते थे। कुलियों की जिंदगी को बहुत करीब से देखा था उन्होंने और इसी से प्रेरित होकर उन्होंने अमिताभ बच्चन अभिनीत 'कुली' फिल्म बना डाली। रियल लाइफ कुली भी इस फिल्म को देखना चाहते थे, लेकिन शो का वक्त उनके माकूल नहीं था। यह परेशानी दूर करने के लिए दिल्ली के शीला सिनेमा में कुलियों के लिए खासतौर पर सुबह आठ बजे का शो रखा गया था।
बडे़ फिल्म स्टारों की खास फिल्म का खास शो उनके चाहने वालों के लिए अकसर आयोजित होता है। कभी यह इतना खास होता है कि उसके किस्से बन जाते हैं, तो कभी यह दोस्ती निभाने का जरिया बनता है। बहुत से फिल्म स्टार हैं, जो अपनी फिल्मों की स्पेशल स्क्रीनिंग किसी खास के लिए करवाते ही हैं। कहते हैं कि विद्या बालन अभिनेत्री रेखा के लिए अपनी हर फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग करवाती हैं।
रेखा के लिए `डर्टी पिक्चर' और `कहानी' की स्पेशल स्क्रीनिंग कराई गई। कैटरीना कैफ ने भी अपनी फिल्म `जब तक है जान' की स्क्रीनिंग खास अपनी टीम के लिए करवाई। इस फिल्म का एक स्पेशल प्रीमियर उन हीरोइनों के लिए भी हुआ, जिन्होंने यश चोपड़ा की फिल्मों में काम किया था। इसमें शर्मिला, श्रीदेवी और खुद कैटरीना भी शामिल हुईं।
एक सुपरस्टार दूसरे सुपरस्टार को अपनी स्पेशल फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग करवाकर उसके प्रति सम्मान भी अदा करता है। जैसे कि बिग बी ने किया। अमिताभ बच्चन ने फिल्म `पा' की स्पेशल स्क्रीनिंग करवाई थी बीमार दिलीप कुमार के लिए। वहीं शाहरुख खान ने `रा.वन' की स्पेशल स्क्रीनिंग अपने दोस्तों के अलावा एक एनजीओ के माध्यम से स्ट्रीट चिल्ड्रेन के लिए भी कराई।
फिल्म 'तारे जमीं पर' की स्पेशल स्क्रीनिंग ने तो अलग ही उदाहरण पेश कर दिया। इसकी स्पेशल स्क्रीनिंग में देश के गणमान्य लोग शामिल थे। इनमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटील सहित लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा, आरती मेहरा और नजमा हेपतुल्ला जैसे नेता शामिल हैं।
50 के दशक के प्रेम की ऊंचाइयां दर्शाती विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्म 'लुटेरा' की स्पेशल स्क्रीनिंग में लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा सहित आर. बाल्की और गौरी शिंदे जैसे फिल्मकार शामिल हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति पाने वाले धावक मिल्खा सिंह की जिंदगी के तमाम उतार चढ़ावों से रूबरू कराने वाली फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' की हाल ही में कई जगह स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गईं। अब स्पेशल स्क्रीनिंग एक रुटीन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण परंपरा बन रही है।