रणवीर ने कहा कि मैं बहुत आभारी हूं कि मैं एक्टर बना। मैं कलाकार होनों के हर पहलु को बहुत संभालकर रखता हूं। हिंदी फिल्मों में काम करना मेरी पसंद है। जहां तक बात है असफलता मिलने की, तो जीवन में ये सब होते रहता है। मैंने हमेशा इसमें यकीन किया है कि फिल्म करने की जो प्रक्रिया होती है, वही सबसे बड़ा ईनाम होती है। अगर उसे पसंद किया जाता है, तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जाती है।
सक्सेस-फेल्यर पर रखी अपनी राय
रणवीर ने आगे कहा कि 'मैं शुक्रगुजार हूं, चाहे कुछ भी हो. मैं नंबर्स के इस खेल को बिल्कुल नहीं समझता और जितना मुमकिन हो सके इससे अलग रहने की कोशिश करता हूं। मैं क्राफ्ट, परफॉर्मेंस और कैरेक्टर पर ध्यान देना चाहता हूं और जो असल में एक कॉलाब्रेटिव इफर्ट है.' उन्होंने आगे कहा, 'मैं इसमें योगदान देने के लिए अपनी बेस्ट कोशिश करना चाहती हूं। इसलिए अगर एक फिल्म कामयाब है तो यह मेरी अपनी नहीं है। इसमें सबका साथ है और यही बात फेल्यर पर भी लागू होती है'।
नाकामी ने बहुत कुछ सिखाया
अपनी बातचीत के दौरान रणवीर सिंह ने आगे बताया कि उन्होंने अपनी नाकामी से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कहा, 'जैसा कि कहा जाता है, आप अपनी कामयाबी की तुलना में अपनी नाकामियों से ज्यादा सीखते हैं और मैंने हाल के दिनों में कुछ चीजें सीखी हैं'। रणवीर ने कहा कि फिलहाल वो रॉकी और रानी की प्रेम कहानी के लिए दिखाए जा रहे फैंस के प्यार से खुश हैं'।
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