अगर आपको मनमोहन देसाई की ब्लॉक बस्टर फिल्म अमर अकबर एंथनी में एंथनी का किरदार याद हो या फिर एन चंद्रा की तेजाब में मुन्ना का तो एक बात तो समझ आई ही होगी कि इन दोनों फिल्मों में मुंबई की टपोरी बोली क्रमश: अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर ने बिल्कुल रपचिक तरीके से पकड़ी थी। रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय के दूसरे गाने की भी खूबी यही है।
गली बॉय के पहले गाने के ज्ञान को साइड में करके इस बार निर्देशक जोया अख्तर ने पूरा खाका ही टपोरी अंदाज में खींचा है। गाने के बोलों में बातें बड़ी बड़ी हैं, जैसे- ‘प्रेयर, आरती या नमाज, मेरी गली में। मां पे गाली तो चमाट, मेरी गली में।’ या फिर, ‘गरीबी चलेंगी लेकिन फरेबी करेंगे नहीं, जलेबी तलेंगे लेकिन पतेली रुकेगी नहीं।’ यूथ को सिखाने का यही नया अंदाज है और दिल की सफाई में ही इनके गानों की आवाज है।
इस लिहाज से गाने के बोल बिल्कुल टपोरी अंदाज में होते हुए भी किरदारों के दिल की बात टिपिकल मुंबइया है। गाने के बोल के हिसाब से ही इसका संगीत सिंगल बीट पर शुरू से आखिर तक सफर करता है और रैपर्स के लिए ये अच्छा भी है क्योंकि इसके चलते इन्हें ऑर्केस्ट्रा का बहुत ताम झाम नहीं सजाना पड़ता है।
किसी भी रैप गाने की जीत होती है इसके बोलों और गाने के अंदाज से। रणवीर सिंह की तारीफ करनी बनती है कि दो पेशेवर रैपर्स डिवाइन और नेएजी के साथ उन्होंने पूरा सुर भी मिलाया है और ताल भी। नए की खोज पर चलते रहना अच्छे संत और अच्छे कलाकार दोनों की निशानी होती है। रणवीर की अदाकारी भी इसी से घुट्टी पाती है।
यहां देखें गाना-