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'मेरे बहुत सारे दोस्त भी ऐसे ही मोड़ पर अटके हुए हैं'

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रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की आकर्षक युवा जोड़ी है। एक समय दोनों का प्यार सुर्खियों में था लेकिन अब वह अच्छे दोस्त और सह-कलाकार हैं। उनकी नई फिल्म रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म और साथ काम करने को लेकर रणबीर-दीपिका से बातचीत की रवि बुले ने।
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क्या जिंदगी में कामयाब होने के लिए वाकई किसी सहारे की जरूरत होती है?

दीपिकाः बिल्कुल। वह सहारा चाहे माता-पिता से मिले या दोस्त या उस व्यक्ति से जिससे आप प्यार करते हैं। ऐसा नहीं है कि हर कामयाब व्यक्ति को सपोर्ट मिलता है परंतु अगर कहीं यह मिल सकता है तो जिंदगी में एडवांटेज है। वैसे अगर जिंदगी में कोई सपोर्ट न भी हो तो आपको अपने दिमाग में यह साफ रखना चाहिए कि हमारा लक्ष्य क्या है।

आप दोनों की जोड़ी को दर्शक आकर्षक मानते हैं। ये जवानी है दीवानी की बड़ी सफलता इसकी गवाह है। क्या नहीं लगता कि नई फिल्म में फिर उसी इमेज को ढूंढने की कोशिश होगी?
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रणबीरः वह फिल्म इससे बहुत अलग एक लव स्टोरी थी। जबकि इस फिल्म में जिंदगी की बातें ज्यादा हैं। दो लोगों की लाइफ की यात्रा है। यह दीपिका और मेरा सौभाग्य है कि इम्तियाज अली की फिल्मों में अगल-अलग काम करने के बाद अब साथ में भी काम कर रहे हैं। हम कोशिश करते हैं अलग-अलग फिल्मों में अलग-अलग ढंग का काम करें। कोई भी ऐक्टर एक जैसा काम करना नहीं चाहता। दर्शकों को नहीं लगना चाहिए कि हम इस फिल्म जैसा देख चुके हैं।

दीपिकाः इस फिल्म का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल अलग है। दर्शक भी इस फिल्म से एक अलग अनुभूति लेकर जाएंगे।रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की आकर्षक युवा जोड़ी है। एक समय दोनों का प्यार सुर्खियों में था लेकिन अब वह अच्छे दोस्त और सह-कलाकार हैं। उनकी नई फिल्म रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म और साथ काम करने को लेकर रणबीर-दीपिका से बातचीत की रवि बुले ने।

क्या जिंदगी में कामयाब होने के लिए वाकई किसी सहारे की जरूरत होती है?

दीपिकाः बिल्कुल। वह सहारा चाहे माता-पिता से मिले या दोस्त या उस व्यक्ति से जिससे आप प्यार करते हैं। ऐसा नहीं है कि हर कामयाब व्यक्ति को सपोर्ट मिलता है परंतु अगर कहीं यह मिल सकता है तो जिंदगी में एडवांटेज है। वैसे अगर जिंदगी में कोई सपोर्ट न भी हो तो आपको अपने दिमाग में यह साफ रखना चाहिए कि हमारा लक्ष्य क्या है।

आप दोनों की जोड़ी को दर्शक आकर्षक मानते हैं। ये जवानी है दीवानी की बड़ी सफलता इसकी गवाह है। क्या नहीं लगता कि नई फिल्म में फिर उसी इमेज को ढूंढने की कोशिश होगी?

रणबीरः वह फिल्म इससे बहुत अलग एक लव स्टोरी थी। जबकि इस फिल्म में जिंदगी की बातें ज्यादा हैं। दो लोगों की लाइफ की यात्रा है। यह दीपिका और मेरा सौभाग्य है कि इम्तियाज अली की फिल्मों में अगल-अलग काम करने के बाद अब साथ में भी काम कर रहे हैं। हम कोशिश करते हैं अलग-अलग फिल्मों में अलग-अलग ढंग का काम करें। कोई भी ऐक्टर एक जैसा काम करना नहीं चाहता। दर्शकों को नहीं लगना चाहिए कि हम इस फिल्म जैसा देख चुके हैं।

दीपिकाः इस फिल्म का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल अलग है। दर्शक भी इस फिल्म से एक अलग अनुभूति लेकर जाएंगे।

'मेरे कई दोस्त भी फिल्म जैसे मोड़ पर अटके हुए हैं'

कहानी में आप युवा पीढ़ी की बातें कर रहे हैं। क्या अलग अनुभव होगा उसे?

दीपिकाः मेरे हिसाब से यह कहानी बिल्कुल आज के समय की है। सार्थक है। मैसेज स्पष्ट है। मेरे खुद के कई दोस्त हैं जो जिंदगी में आगे बढ़ते हुए किसी मोड़ पर अटके हैं। कहां जाएं, कैसे बढ़ें? उनके सामने लक्ष्य साफ नहीं था।

रणबीरः युवाओं के लिए दीपिका आदर्श उदाहरण हैं। वह अपने टारगेट को लेकर शुरू से बहुत क्लीयर थीं। उन्होंने अपने माता-पिता से नहीं कहा होता कि मॉडलिंग और ऐक्टिंग करना चाहती हैं तो शायद वह भी अटक जातीं।

दीपिकाः हम सभी अपनी लाइफ में उम्र के हर दौर में अलग-अलग रोल प्ले करते हैं। जिसमें अक्सर दूसरों के लिए ही जीते हैं। हम पर माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चों के दबाव होते हैं। ऐसे में शायद ही कभी खयाल आता है कि हम खुद क्या करना चाहते हैं। पर्दे पर ऐक्टर दो घंटे में नाकामी से कामयाबी तक पहुंच जाते हैं, लेकिन वास्तविक जिंदगी इतनी आसान कहां होती है?

रणबीरः यह सही है कि आम आदमी के रोज के जीवन में एक ऐसा चक्र बन जाता है, जिसे तोड़ पाना संभव नहीं होता। फिर भी मुझे लगता है कि लाइफ में कभी न कभी, कहीं ऐसा मौका आता है, कोई आपको प्रेरणा की तरह मिलता है जब आप असंभव को संभव कर सकते हैं। ऐसे मौके को हमें पहचानना पड़ता है।

'अच्छा-बुरा वक्त हर एक्टर का आता है'

ऐक्टर अलग-अलग किरदार निभाते हैं लेकिन किसी मोड़ पर कभी ऐसा लगा कि एकरसता के चक्र में फंस गए हैं?

दीपिकाः ऐक्टर की जिंदगी का कोई दिन एक जैसा नहीं होता। आज वह कोई किरदार कर रहा है, कल कोई और करेगा। कभी वह डबिंग करता है। कभी कहानी सुनता है। कभी रिहर्सल करता है। ऐक्टर को यह फायदा होता है कि उसे अगर अपने काम से ब्रेक लेना है तो वह ले सकता है। मुझे लगता है कि क्रिएटिव फील्ड में आप जो चाहते हैं वह कर सकते हैं, खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं। कारपोरेट जिंदगी में शायद कलाकारों की जिंदगी जितना लचीलापन नहीं है।

रणबीरः दीपिका की बात से सहमत होते हुए मैं आगे यह भी कहना चाहूंगा कि ऐक्टिंग करते हुए भी आप कभी-कभी फंस जाते हैं कि यार मेरी लिमिट यही है। इससे आगे बढ़ नहीं सकता। मैं इसी तरह की फिल्में करूंगा। मुझे ब्रेक नहीं लेना क्योंकि मेरा टाइम निकल जाएगा। लेकिन मुझे लगता है कि इससे बचना चाहिए। ब्रेक लेकर कुछ और करें। चाहे बिस्तर पर लेटे हुए पंखे को देखते रहें। खूब सारी फिल्में देखें। ब्रेक आपकी बैटरी को चार्ज करता है।

क्या आपके करिअर में ऐसा दौर आया?

रणबीरः बिल्कुल। हर ऐक्टर की लाइफ में ऐसा टाइम आता है।

दीपिका, आपका जवाब अलग था इस मुद्दे पर!

दीपिकाः ऐसी बात नहीं है। मैं रणबीर से सहमत हूं और मैं खुद ब्रेक लेती हूं क्योंकि कई कारणों से यह जरूरी होता है। ऐक्टिंग करते हुए आप सिर्फ शारीरिक रूप से ही सक्रिय नहीं रहते बल्कि मन और दिमाग भी उस किरदार की तरह ढालना होता है। हर दिन आपको अलग-अलग भावनाओं के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। अतः यह व्यक्ति को निचोड़ लेने वाला पेशा है और किरदार से बाहर निकलने के लिए आपको सबसे दूर होकर एकांत में रहने की जरूरत महसूस होती है। ताकि खुद को वापस पा सकें। मुझे नहीं लगता कि एक फिल्म के बाद आप दूसरी फिल्म के लिए एकदम तैयार रहें। हां, लेकिन साथ ही यह कहूंगी कि मैं अपने काम को बहुत एंजॉय करती हूं।

'फ्लॉप फिल्म से फिल्मों को लेकर मन में झिझक होती है'

क्या यह होता है कि किसी दिन काम करने का मूड न हो और फिर भी शूटिंग करनी पड़े?

रणबीरः ऐसा होता है। फिल्म महंगा माध्यम है, कई लोग एक साथ काम करते हैं और इसे आप अपने मूड से नहीं चला सकते। आपको बताना पड़ता है आप प्रोफेशनल हैं।

क्या कपूर परिवार की समृद्ध परंपरा का होने से आपसे ज्यादा उम्मीदें लगाई जाती हैं?

रणबीरः मुझे लगता है कि कोई भी ऐक्टर हो उसकी सफलता या विफलता उसकी आखिरी फिल्म के परफॉरमेंस से तय होती है। मैं मानता हूं कि मेरी पिछली तीन फिल्में फ्लॉप रही हैं।

आप स्क्रिप्ट सुनते हैं। ध्यान से चुनते हैं। प्रोड्यूसर-डायरेक्टर देखते हैं कि बड़े हों, अनुभवी हों। फिर कैसे फ्लॉप हो जाती हैं?

दीपिकाः कई बार कहानी नहीं चलती। कई बार जैसा सोचा होता है फिल्म वैसी नहीं बन पाती। कभी खराब या फ्लॉप फिल्म बनाने का इरादा नहीं होता।

रणबीरः ..और इंडस्ट्री में अच्छी फिल्म बनाने का कोई फार्मूला तो है नहीं।

फिल्म नाकाम होने से ऐक्टर के रूप में आप पर क्या प्रभाव पड़ता है?

रणबीरः मन के अंदर एक झिझक पैदा है कि यार मेरा सिलेक्शन ठीक नहीं रहा। इसके बाद अगली फिल्म के प्रति एप्रोच बदलती है। निश्चित ही अच्छा ऐक्टर है तो वह नाकामी के बादऔर गंभीरता से काम करेगा। यहां हर ऐक्टर अंदर से असुरक्षित महसूस करता है। चाहे वह सफल हो या न हो।
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'फिल्म फ्लॉप होने का निर्देशक से रिश्तों पर फर्क नहीं पड़ता'

जिस डायरेक्टर के साथ आपकी फिल्म फ्लॉप हुई, आपने उसके साथ दूसरी बार काम नहीं किया!

रणबीरः सही है, ये सोचने वाली बात है। जब सब इंतजार करते हैं और फिल्म फ्लॉप हो जाती है तो कहीं न कहीं आपस में भी विश्वास टूटता है कि हम ठीक नहीं कर पाए। लेकिन ऐसा नहीं है कि संबंध बिगड़ जाते हैं।

दीपिकाः फिल्म फ्लॉप होने से कोई बुरा ऐक्टर या बुरा डायरेक्टर नहीं साबित होता। इससे सिर्फ इतना पता चलता है कि उस खास फिल्म के लिए उन्होंने जिस ऊर्जा से काम किया, वह मैच नहीं हुई। इससे उन्होंने जो उम्मीद की थी, वह फिल्म नहीं बन सकी। रणबीर की हालिया फिल्में अगर फ्लॉप हुई हैं तो इससे वह खराब ऐक्टर नहीं हो गए, न ही फिल्म चुनने की उनकी प्रक्रिया बदलनी चाहिए क्योंकि अपनी इसी सोच से तो उन्होंने वे फिल्में चुनी थीं, जो हिट हुईं। मुझे लगता है कि हमें अपने दिल की सुनते हुए फिल्में चुनना चाहिए।
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