मामले को गलत तरीके से पेश किया गया
स्थिति को समझाने के लिए राजपाल ने फिल्म मेकिंग की तुलना चाय बनाने से की। उन्होंने कहा कि चाय सिर्फ एक चीज से नहीं बनती। इसमें चीनी, चाय की पत्तियां, दूध और कई लोगों का प्रयास शामिल होता है। इसी तरह एक फिल्म में भी कई लोगों का पैसा और मेहनत लगती है।
किसी फिल्म की रिलीज से पहले उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से उससे जुड़े सभी लोग प्रभावित होते हैं। सवाल यह भी है कि अगर यह लोन था और सभी डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं, तो इसे सार्वजनिक रूप से धोखाधड़ी क्यों कहा गया?
यह खामखा प्रचार था और लोगों ने जनता के सामने मामले को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने आगे दावा किया कि इस विवाद के कारण प्रोजेक्ट को रिलीज से पहले ही भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। एक्टर ने बताया कि फिल्म में लगभग 200 कलाकार और हजारों पब्लिक एक्टर शामिल थे और कानूनी मुद्दों के कारण इसके रुकने से पहले इसे 1000 सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी।