मलयालम फिल्म से प्रेरित थी कहानी
बॉलीवुड में साउथ की फिल्मों के रीमेक बनाए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप की कमस मलयालम फिल्म ‘वाझवे मय्यम’ (1970) का रीमेक थी। इस फिल्म का निर्देशन एस सेतुमाधवन ने किया था, हालांकि 'आप की कमस' का अंत अलग रखा गया था। वहीं, इस फिल्म को बाद में निर्देशक दसारी नारायण राव ने तेलुगू में भी बनाया, जिसका नाम ‘एडदुगुला बंधम’ (1985) था। इसमें हन बाबू और जयसुधा मुख्य भूमिका में थे और इस फिल्म की कहानी मलयालम फिल्म वाली ही थी।
राजेश खन्ना को सुन पंचद दा ने बदली धुन
फिल्म का संगीत आर.डी बर्मन ने दिया था। 'जय जय शिव शंकर', 'जिंदगी के सफर', 'करवटें बदलते रहे सारी रात' आदि सभी यादगार गाने हैं। आनंद बक्शी के इन गानों को किशोर और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म का सबसे पसंद किया जाने वाला गाना 'जय जय शिव शंकर' पहले ऐसा नहीं होने वाला था। पंचम दा ने गाने के लिए कोई और धुन तैयार की थी, लेकिन जब उन्होंने राजेश खन्ना को अपने ही अंदाज में गाने को गुनगुनाते हुए देखा तो उनको वह धुन काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने काका के अंदाज में ही फिल्म के गाने को शूट किया था। हालांकि राजेश खन्ना को इसका क्रेडिट नहीं मिला। 'सुनो कुछ कहो' गाने को रिकॉर्ड करने के दौरान लता मंगेशकर काफी परेशान थी। पंचम दा जो चाह रहे थे, वह उसे सही ढंग से निभा नहीं पा रही थीं। तब किशोर कुमार ने लता मंगेशकर की मदद की और उन्हें कहा कि ऐसे सोच कर गाना गाओ की इस कमरे में कोई नहीं है, तुम अलग कमरे में गाना गा रही हो। इसके बाद लता मंगेशकर ने शानदार तरीके से गाने को गाया था।
क्लिपिंग शॉट के आए थे धर्मेंद्र
फिल्म की शूटिंग 16 रील में पूरे हुई थी और फिल्म का मुहूर्त शॉट 3 जनवरी 1972 को लिया गया थ। वहीं, क्लिपिंग शॉट लेने के लिए अभिनेता धर्मेंद्र को बुलाया गया था। फिल्म की शूटिंग लेह लद्दाख, जम्मू कश्मीर और मुंबई के महबूब स्टूडियो में की गई थी। इस फिल्म को यूके के नटराज इंडियन सिनेमा थिएटर में भी ओपनिंग सेरेमनी के दौरान दिखाया गया था। राजेश खन्ना और संजीव कपूर की साथ में फुल टाइम ये पहली फिल्म थी। इससे पहले संजीव कुमार राजेश खन्ना की फिल्म 'बंधन' में गेस्ट अपिरियंस में आए थे। वहीं, 'आक्रमण' में राजेश खन्ना ने भी केवल गेस्ट अपिरियंस किया था।
शानदार स्टार कास्ट और फिल्म का बजट
फिल्म में संजीव कुमार ने बहुत अच्छा काम किया है, हालांकि उनके पास सीमित स्क्रीन स्पेस है। मुमताज चुलबुली हैं और काका के साथ बढ़िया केमिस्ट्री साझा करती हैं, विशेष रूप से ‘जय जय शिव शंकर’ गाने में। राजेश खन्ना का अभिनय शानदार है, वह एक रोमांटिक होरी से धीरे-धीरे अपनी पत्नी पर संदेह करने वाले बन जाते हैं और अंत में पश्चाताप करने वाला व्यक्ति बन जाते हैं। फिल्म के बजट का कही भी जिक्र नहीं है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक कहा जाता है कि फिल्म 90 लाख में बनी थी। वहीं फिल्म ने भारत में 1.6 करोड़ की कमाई की थी।
इस फिल्म की वजह से 'A' से फिल्मों का नाम रखते थे जे ओमप्रकाश
निर्देशक जे ओमप्रकाश (जो राकेश रोशन के ससुर और ऋतिक रोशन के नाना थे) हमेशा ऐसी फिल्में बनाते थे जिनके नाम 'A' अक्षर से शुरू होते थे और जो समाज के बारे में बात करती हैं। एक बार उन्होंने बताया था कि जब उन्होंने फिल्म बनानी शुरू की तो पहली फिल्म आप की कसम का नाम A से था और यह हिट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने जीतने भी फिल्में बनाई उनके नाम A से ही रखे। एक बार अलग अक्षर से फिल्म बनाई तो वह चली नहीं और इसके बाद उन्होंने कभी दूसरे अक्षर से फिल्म नहीं बनाई।