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Raghubir Yadav: साड़ी पहनकर करते थे महिला किरदार, ढाई रुपये में किया गुजारा; जानें रघुबीर यादव के 10 किस्से

Thu, 25 Jun 2026 07:00 AM IST
अंजू बाजपेयी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Raghubir Yadav Birthday: रघुबीर यादव का आज 69वां जन्मदिन है। रघुबीर यादव भारतीय सिनेमा और रंगमंच का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी सादगी और बेहतरीन अभिनय से हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। उनके जन्मदिन के मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुडे़ 10 दिलचस्प किस्से।
 
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रघुबीर यादव - फोटो : अमर उजाला
25 जून 1957 को मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास एक गांव में जन्मे रघुबीर यादव आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। किसान परिवार में पले-बढ़े रघुबीर का जीवन बेहद संघर्षों भरा रहा है। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े पूरे 10 दिलचस्प किस्से।
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
फेल होने के डर से भागे और बने 'महिला कलाकार'
बोर्ड परीक्षा में फेल होने के डर से रघुबीर घर से भागकर ललितपुर आ गए। वहां पैसों की तंगी के बीच उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेता अन्नू कपूर के पिता मदनलाल की थियेटर कंपनी से हुई। रघुबीर का गाना सुनकर मदनलाल ने उन्हें अपनी कंपनी में रख लिया। उन दिनों थियेटर में महिलाओं का काम करना मना था, इसलिए शुरुआती दिनों में रघुबीर ने कई साल तक साड़ी पहनकर और आवाज बदलकर महिला किरदारों की भूमिकाएं निभाईं।
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
ढाई रुपये रोज पर गुजारा और भूखे पेट सोना
करियर की शुरुआत में उन्हें थियेटर से रोजाना सिर्फ ढाई रुपये मिलते थे, वो भी कभी-कभी नहीं मिलते थे। वह सिर्फ आटा और टमाटर खरीदकर चटनी-रोटी खाते थे। कई बार तो पास में बैठने वाले जुआरी उनका खाना खा जाते थे और उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता था।

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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
ताने के कारण 20 साल तक घर नहीं लौटे
घर से भागने के बाद रघुबीर ने पिता को चिट्ठी लिखी थी कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे परिवार का नाम खराब हो। छह महीने बाद जब वह घर लौटे, तो एक रिश्तेदार ने ताना मारा- 'हमें लगा था अब तुम्हें सीधे सिनेमा के पर्दे पर ही देखेंगे।' यह बात रघुबीर को इतनी चुभी कि वह 20 साल तक दोबारा अपने गांव नहीं गए। वह तभी लौटे जब उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक बड़ी पहचान बना ली।
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
कठपुतली थियेटर से NSD का सफर
पारसी थियेटर और गांव-गांव घूमने के बाद रघुबीर लखनऊ में एक कठपुतली थियेटर से जुड़े। यहीं उन्हें 'राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय' (NSD) के बारे में पता चला और उन्होंने 1974 में वहां एडमिशन ले लिया। क्लास के पहले दिन जब डायरेक्टर इब्राहिम अल्काजी ने पूछा कि किसे क्या सीखना है, तो सबने एक्टिंग या डायरेक्शन चुना, लेकिन रघुबीर ने कहा- 'मुझे सब सीखना है।'
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
'मैसी साहब' के लिए सीखी अंग्रेजी, फिर भी नहीं छोड़ा थियेटर
फिल्म 'मैसी साहब' रघुबीर के करियर का टर्निंग पॉइंट थी। एक एंग्लो-इंडियन का किरदार निभाने के लिए उन्होंने महीनों अंग्रेजी सीखी और उस दौर के रहन-सहन पर रिसर्च की। फिल्म सुपरहिट रही और वह रातों-रात स्टार बन गए। लेकिन मुंबई जाने के बजाय वह वापस दिल्ली आकर थियेटर करने लगे।
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे बने घर-घर के 'मुंगेरीलाल'
साल 1994 में दूरदर्शन के मशहूर शो 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' के लिए निर्देशक प्रकाश झा को एक आम भारतीय चेहरे की तलाश थी। रघुबीर की मासूमियत और सादगी इस रोल के लिए बिल्कुल फिट बैठी। उन्होंने इस किरदार को अमर कर दिया और वह घर-घर में 'मुंगेरीलाल' के नाम से मशहूर हो गए।

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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
'लगान' के सेट पर बचपन का अनुभव आया काम
2001 की सुपरहिट फिल्म 'लगान' में रघुबीर ने 'भूरा' का किरदार निभाया था। वह हमेशा सेट पर सबसे पहले पहुंचते थे, ताकि गांव के माहौल और बोली को अपना सकें। बचपन में भैंस चराने और बैलगाड़ी चलाने का उनका अनुभव इस रोल को पर्दे पर बिल्कुल असली बनाने में काम आया।

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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
'महंगाई डायन' गाने को बनाया जनता की आवाज
रघुबीर हमेशा से एक संगीतकार बनना चाहते थे। 2010 की फिल्म 'पीपली लाइव' में उन्होंने अभिनय तो किया ही, साथ ही मध्य प्रदेश के एक लोकगीत 'महंगाई डायन खाए जात है' को अपनी देसी आवाज में गाया। यह गाना इतना मशहूर हुआ कि बढ़ती महंगाई के खिलाफ देश की जनता की आवाज बन गया।
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रघुबीर यादव - फोटो : सोशल मीडिया
'पंचायत' के 'प्रधान जी' बनकर छा गए
साल 2020 में आई वेब सीरीज 'पंचायत' ने रघुबीर यादव को आज की युवा पीढ़ी से दोबारा मिलवाया। 'प्रधान जी' (बृजभूषण दुबे) के रोल में उनकी सादगी और कमाल के अभिनय ने सबका दिल जीत लिया। आज लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और 'प्रधान जी' के नाम से ज्यादा जानते हैं।
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