फिल्मी दुनिया के सितारे अभिनेता देश में असहिष्णुता और नेशनल अवार्ड लौटाने पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। इसमें भाजपा संसाद किरण खेर के पति और मशहूर अभिनेता अनुपम खेर लगातार सम्मान न लौटाने और भाजपा सरकार के बचाव में तर्क रख रहे थे। लेकिन अब भाजपा नेताओं ने उन्हें नाराज कर दिया है।
विज्ञापन
बीते दो दिनों में अभिनेता शाहरुख खान को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से जो बयानबाजी की गई, वह अनुपम खेर को नगवार गुजरी। इस पर उन्होंने भाजपा नेताओं को जुबान बंद रखने की नसीहत दी। अनुपम खेर के मुताबिक शाहरुख खान नेशनल आइकन हैं। देश को शाहरुख पर नाज है।
अनुपम के मुताबिक भाजपा नेताओं को शाहरुख के बारे में कुछ कहने से पहले सोचना चाहिए। अपनी जुबान पर काबू रखना चाहिए और शाहरुख के बारे में उल जलूल नहीं बोलना चाहिए। हालांकि इससे पहले अनुपम असहिष्णुता के मुद्दे पर सम्मान वापसी करने वालों का विरोध करते रहे हैं।
विज्ञापन
वह मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करने को गलत बताते रहे हैं। इसको लेकर वह अपने एक प्रतिनिधमंडल के साथ 6 नवंबर को राष्ट्रपति से मुलाकात भी करने वाले हैं। लेकिन शाहरुख मामले में पर उन्होंने भाजपा का पुरजोर विरोध किया है। गौरतलब है कि अनुपम खेर ने शाहरुख खान के साथ कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है। दोनों-एक दूसरे के अच्छे मित्र हैं।
Some members of the BJP really need to control their tongue & stop talking rubbish about @iamsrk. He is a national icon & We r PROUD of him.— Anupam Kher (@AnupamPkher) November 4, 2015
शाहरुख को क्या कहा भाजपा नेताओं ने
लेखकों और कलाकारों के पुरस्कार वापसी अभियान का समर्थन के बाद शाहरुख को देशद्रोही करार देने वाले कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी के दबाव में अपना ट्वीट तो वापस ले लिया लेकिन सांसद महंत आदित्यनाथ ने किंग खान की तुलना मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद से कर डाली।
आदित्यनाथ ने शाहरुख पर हमले करते हुए कहा कि अगर बहुसंख्यक हिंदुओं ने उनकी फिल्म का बहिष्कार किया तो वह दूसरे मुसलमानों की तरह सड़क पर आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि शाहरुख और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और आतंकी सरगना हाफिज सईद की भाषा एक है।
वहीं साध्वी प्राची ने शाहरुख को पाकिस्तानी एजेंट बताते हुए उन्हें पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी थी। जिसके बाद 26/11 आतंकी हमले के आरोपी हफीज सईद ने उन्हें पाकिस्तान आ जाने का निमंत्रण भी दिया था।
उधर, भाजपा समर्थक योगगुरु बाबा रामदेव ने शाहरुख के सम्मान लौटाने मामले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि शाहरुख को सिर्फ अवार्ड ही नहीं देश से कमाए गए पैसे भी वापस लौटा देना चाहिए। इन सब बयानों से भाजपा समर्थक रहे अनुपम खेर, मधुर भंडाकर, कबीर खान भी नाराज हो गए हैं।
क्या कहा शाहरुख ने जिसपर मचा है इतना बवाल
इससे पहले अपने 50वें जन्मदिन पर चाहने वालों का संदेश सुनन और उन्हें धन्यवाद करने कुछ टीवी चैनलों पर आए शाहरुख खान ने कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। देश पहले ट्विटर टाउनहॉल कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि असहिष्णुता के विरोध में अगर उन्हें भी पुरस्कार लौटान पड़ा तो वह भी प्रतीकात्मक तौर पर ऐसा करेंगे।
उनके मुताबिक देश में असहनशीलता चरम पर है। लोग बिना सोचे समझे कोई बात बोल रहे हैं। ऐसे में अगर शाहरुख खान के पुरस्कार लौटाने से चीजें बदल सकती हैं तो यह एक ईमानदार और बहादुरी भरा कदम है, इसे वो जरूर उठाना चाहेंगे।
किंग खान ने कहा कि हमें यह सोच कायम रखनी होगी कि सभी धर्म बराबर हैं। आजकल देश में ऐसी हवा चल रही है, जिसमें अगर आप सेक्युलर नहीं है तो यह आपके लिए सबसे बड़ा अपराध है। गौरतलब है कि 2005 में शाहरुख को पद्मश्री सम्मान दिया गया था।
पिछले महीने दिल्ली से लगे गौतमबुद्धनगर जिले के बिसहाड़ा गांव में एक मुसलमान की गाय का मांस रखने के शक में हत्या कर दी गई थी। इससे पहले कर्नाटक में तर्कवादी लेखक एमएम कलबुर्गी की कट्टरपंथी तत्वों ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद से ही कई लेखकों ने असहिष्णुता के विरोध में अपने सम्मान लौटा दिए।
बाद में चित्रकार, वैज्ञानिक, इतिहासकार भी उस मुहिम में शामिल हो गए। फिल्म निर्देशक कुंदन शाह, दिबाकर बनर्जी और मशहूर डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्देशक आनंद पटवर्धन के नेतृत्व में फिल्मी दुनिया के 10 हस्तियों ने नेशनल अवार्ड लौटाए थे। इसमें लिपिका सिंह, निशांत जैन, कीर्ति नेखवा, हर्ष कुलकर्णी, हरि नायर जैसे बड़े नाम थे।
कई उद्योगपतियों ने भी देश में बढ़ रही असहिष्णुता के मुद्दे पर बयान दिया है। जिनमें एनआर नारायणमूर्ति और किरण शॉ मजुमदार प्रमुख हैं। हालांकि सरकार ऐसे विरोधों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि ये विरोध एक विचारधारा से प्रेरित और राजनीतिक हैं।