सेंसर अध्यक्ष पहलाज निहलानी अपने बेरुखे रवैए को लेकर लगातार खबरों में बने हुए हैं। अभी नवाजुद्दीन सिद्दीकी की आने वाली फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' को 48 कट का मामला सुलटा भी नहीं था कि पहलाज निहलानी ने एक और मुसीबत मोल ले ही है।
दरअसल, बताया जा रहा है कि मलयालम फिल्म 'का बॉडीस्केप्स' को सर्टिफिकेट न मिलने पर मेकर्स ने हाई कोर्ट का रुख किया। इस पर हाई कोर्ट ने सेंसर अध्यक्ष पहलाज निहलानी को नेटिस भेजा है और कहा है कि सेंसर बोर्ड की 18 सदस्यीय टीम तिरुवनंतपुरम जाए और फिल्म को फिर से देखे।
सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को पहले ही तीन बार देख लिया है। फिल्म के डायरेक्टर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "निहलानी और सेंसर टीम बेवजह ही ऐसा कर रही है। वो नहीं चाहते कि फिल्म रिलीज हो। शुक्रवार को सेंसर बोर्ड के जिन सदस्यों ने फिल्म देखी, मिली जुली प्रतिक्रिया दी। 9 सदस्य चाहते हैं कि फिल्म कुछ कट के साथ रिलीज कर दी जाए लेकिन बाकी इसके रिलीज के लिए तैयार ही नहीं हैं।"
इसके साथ ही उन्होंने फिल्म निर्माताओं ने इस तरह की सेंसरशिप को अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बताया है। आपको बता दें कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट' देने से इसलिए मना कर दिया है क्योंकि फिल्म समलैंगिकता जैसे मुद्दे पर बनी है।