रंगभेद पर कई बार बहस छिड़ने के बाद हाल ही में रिलीज हुई नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' में भी नवाज ने इस मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। इस फिल्म में नवाज ने एक ऐसे इंसान का किरदार निभाया है जिसे अपने काले रंग से बेहद प्यार है।
नवाजुद्दीन रंग भेद पर बात करते हुए कहते हैं कि हमारे देश में 70 से 80 प्रतिशत लोगों का रंग सांवला है। बावजूद इसके कई बड़ी हस्तियां फेयरनेस क्रीम को प्रमोट करती हैं। जिसका ये साफ मतलब निकलता है कि ये लोग देश की सांवले रंग की जनता को कॉप्लेक्स दे रहे हैं।
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'आप खूबसूरत नहीं हो सकते क्योंकि आप काले हैं'। अपनी फिल्म का उदाहरण देते हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं शायद उनकी फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' ऐसे लोगों के जख्मों का इलाज करके समाज में रंगभेद को लेकर लोगों के बीच इस सोच को कुछ बदल सके।
बता दें ये कोई पहली बार नहीं है कि किसी स्टार ने रंगभेद का मुद्दा उठाया हो, इससे पहले भी अभय देओल ने फेयरनेस क्रीम के एड करने वाले एक्टर्स के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने ऐसे विज्ञापनों पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि कोई भी व्यक्ति आपको यह नहीं बताएगा कि ये सब विज्ञापन बिल्कुल झूठे और रंगभेद को बढ़वा देने वाले हैं।
इस बयान के बाद अभय काफी फेमस हुए जिसके बाद 'वेलेरियन' और 'द सिटी ऑफ थाउसेंड प्लानेट' जैसी बेहतरीन फिल्मों के मेकर्स ने उन्हें 'वेलेरियन ऑफ रेसिज्म' के अवॉर्ड से नवाजा।