अक्षय कुमार को फिल्म 'रुस्तम' और 'एयरलिफ्ट' के लिए अपनी जिंदगी का पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। इस घोषणा के बाद ट्विटर पर ज्यूरी के फैसले की जमकर आलोचना हो रही है। लोगों का कहना है कि अक्षय की बजाय आमिर खान को ये अवॉर्ड मिलना चाहिए था। अब 64वें नेशनल अवॉर्ड ज्यूरी के हेड प्रियदर्शन ने इस फैसले पर सफाई दी है।
मुंबई मिरर को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अक्षय ही इस अवॉर्ड के असल हकदार थे इसलिए ज्यूरी ने उन्हें ये अवॉर्ड दिया। प्रियदर्शन ने कहा, 'मेरे साथ 38 ज्यूरी मेंबर थे। आप इतने सारे लोगों के फैसले पर कैसे सवाल उठा सकते हैं? पिछले साल रमेश सिप्पी ज्यूरी के हेड थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन को फिल्म 'पीकू' के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया था तब किसी ने उनसे सवाल क्यों नहीं किया? '
आमिर को अवॉर्ड न मिलने पर प्रियदर्शन ने कहा, 'आमिर ने पिछले दिनों कहा था कि अगर उन्हें अवॉर्ड मिलता है तो वो पर्सनली उसे लेने के लिए नहीं आएंगे। जहां तक मुझे याद है, जब आमिर की फिल्म 'तारे जमीन पर' को नेशनल अवॉर्ड मिला था, तब भी आमिर उस समारोह में मौजूद नहीं थे। इसलिए किसी ऐसे एक्टर को अवॉर्ड क्यों देना।'
मनोज वाजपेयी की फिल्म 'अलीगढ़' को एक भी अवॉर्ड न मिलने पर प्रियदर्शन ने कहा कि इस साल बॉलीवुड के मुकाबले क्षेत्रीय सिनेमा से ज्यादा अच्छी फिल्में आई हैं। इन फिल्मों में न ही सिर्फ एंटरटेनमेंट है बल्कि ये सामाजिक मुद्दों को भी छूती हैं।