यह चिंता का विषय है- रत्ना पाठक
रत्ना ने कहा कि यह बहुत चिंताजनक है। उनके अपने बच्चे सुबह नाश्ता करके कमरे में चले जाते हैं और दिन भर बाहर नहीं आते। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही भविष्य हम चाहते हैं, जहां लोग असल दुनिया की बजाय आभासी दुनिया में रहें? उन्हें उम्मीद है कि भारत में लोग मानवीय रिश्तों को महत्व देंगे और उन्हें मनाएंगे।
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अरशद वारसी ने भी जताई थी चिंता
इससे पहले अभिनेता अरशद वारसी ने भी यही चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि आज की पीढ़ी का जीवन उनके फोन के इर्द-गिर्द घूमता है। बच्चे अपने कमरे में घुसकर कई दिनों तक बाहर नहीं निकलते।
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