'मद्रास कैफे' में बतौर हीरोईन अब भले ही नरगिस फाकरी हों लेकिन यह हीरोईन निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद नहीं थी। जॉन अब्राहिम और शुजीत सरकार इस फिल्म में फ्रीडा पिंटो को लेने का मन बना चुके थे।
शुजीत ने फिल्म 'मद्रास कैफे' की स्क्रिप्ट छह सालों पहले लिखी गयी थी और उस वक्त जॉन और शुजीत की इच्छा थी कि वे इस फिल्म में फ्रीडा को लें। खुद फ्रीडा ने फिल्म करने में दिलचस्पी दिखाई थी। उन्हें स्क्रिप्ट बहुत पसंद आयी थी।
लेकिन फिर इस फिल्म को बनने में वक्त लग गया और फ्रीडा अन्य फिल्मों में व्यस्त हो गयीं। तो उन्होंने इस फिल्म से अपना नाम वापस ले लिया।
यह बात खुद जॉन अब्राहम ने अपनी बातचीत के दौरान बताई है कि उन्हें मद्रास कैफे के लिए किसी ऐसी ही लड़की की तलाश थी, जो विदेशी नजर आये।
फ्रीडा में वह बात थी। लेकिन जब फ्रीडा के पास वक्त नहीं था तो फिर उन्होंने नरगिस को लेने का मन बनाया। जॉन का दावा है कि फिल्म बेहतरीन बनी है।