बॉलीवुड में जब भी खूबसूरती और उम्दा अभिनय करने वाली अभिनेत्रियों का नाम लिया जाता है, उसमें अभिनेत्री नंदा को जरूर याद किया जाता है। हिंदी सिनेमा में अभिनेत्री नंदा की छवि 'छोटी बहन' वाली थी। क्योंकि उन्होंने पांच साल की उम्र से ही हीरो की छोटी बहन की भूमिका निभाना शुरू कर दिया था। हालांकि, कहते हैं कि शुरू में नंदा बेमन से ही इंडस्ट्री में आई थीं, लेकिन पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई और 10 साल की उम्र में ही उन्होंने अपनी फिल्मी पारी शुरू कर दी थी।
फिल्म में लड़के का रोल करने के लिए कटवा लिए थे बाल
अभिनेत्री नंदा की आज बर्थ एनिवर्सरी है। नंदा का जन्म 8 जनवरी 1939 को हुआ था। नंदा अपने दौर की बेहद खूबसूरत और लाजवाब अदाकारा थीं। फिल्मी दुनिया में आने की नंदा की कहानी बेहद ही दिलचस्प है। जब अभिनेत्री पांच साल की थीं और अपने स्कूल से लौटी थीं तो पिता ने उनसे कहा कि एक फिल्म में तुम्हारी शूटिंग है, लेकिन इसके लिए तुम्हें अपने बाल काटने होंगे। अभिनेत्री नंदा के पिता विनायक दामोदर कर्नाटकी मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता और निर्देशक थे। मां के समझाने पर नंदा के बाल लड़कों की तरह काट दिए गए।
आजाद हिंद फौज में जाना चाहती थीं अभिनेत्री
एक इंटरव्यू में अभिनेत्री नंदा ने बताया था कि उनका बचपन से सपना था कि वह आजाद हिन्द फौज में जाना चाहती थीं। देश की आजादी में अपना योगदान देना चाहती थीं। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह उन्हें कोल्हापुर से मुंबई लेकर आ गई। बता दें कि अभिनेत्री ने अपने करियर में 70 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। फिल्म ‘शोर’ बतौर अभिनेत्री नंदा की अंतिम हिट फिल्म थी।
ताउम्र अविवाहित रहीं अभिनेत्री
खबरों की मानें तो अभिनेत्री नंदा निर्देशक मनमोहन देसाई से प्यार करती थीं। यह प्यार दोनों तरफ से था, लेकिन उन्होंने कभी अपने प्यार का इजहार नहीं किया और मनमोहन ने शादी कर ली। मनमोहन की शादी के बाद नंदा अपनी ही जिंदगी में काफी सिमट गईं। हालांकि, कुछ समय के बाद मनमोहन की पत्नी का निधन हो गया और उन्होंने फिर से नंदा से अपने प्यार का इजहार किया। नंदा ने उनके प्यार को स्वीकार भी कर लिया। इसके बाद दोनों ने सगाई भी की थी। सगाई के दो साल मनमोहन देसाई की एक हादसे में मौत हो गई। इसके बाद नंदा जीवन भर अकेली रहीं और शादी नहीं की।
जवाहरलाल नेहरू से मिला था विशेष पुरस्कार
अभिनेत्री नंदा को जवाहरलाल नेहरू से विशेष पुरस्कार भी मिला था। यह सम्मान उन्हें दिनकर पाटिल की मराठी फिल्म ‘कुलदेवता’ के लिए दिया गया था। फिल्म में उनके अभिनय की भी खूब सराहना की गई थी।