मोहेंजो दारो को बनाने वाले फिल्म की नाकामी के बाद एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं। वैसे निर्माता स्टूडियो, निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और दर्शकों को ट्रेलर देखते ही आभास हो गया था कि फिल्म में भीड़ खींचने वाली बात नहीं है। फिर क्यों समय रहते नहीं उठाए गए सही कदम...?
-सफलता के सौ माई-बाप होते हैं लेकिन नाकामी अनाथ होती है। साल की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में शुमार मोहेंजे दारो के बॉक्स ऑफिस पर लुढ़कते ही उसके निर्माताओं में एक-दूसरे के माथे दोष मढ़ने का दौर चल पड़ा है। 160 करोड़ रुपये बजट की बताई जा रही फिल्म पहले हफ्ते में देसी टिकट खिड़की पर 50 करोड़ का भी बिजनेस नहीं कर सकी। इसकी रिलीज के बाद निर्देशक गोवारिकर विदेश चले गए थे और तब पिछले हफ्ते मीडिया में आया कि गोवारिकर के जिद्दी रवैये से मोहेंजे दारो टिकट खिड़की पर गिरी है।
गोवारिकर सप्ताहांत में लौटे हैं और उनका खेमा जवाब देने के लिए सक्रिय हो गया है। फिल्म का निर्माण गोवारिकर की पत्नी सुनीता के साथ कारपोरेट स्टूडियो यूटीवी मोशन पिक्चर्स ने मिल कर किया है। गुजरे हफ्ते यूटीवी के सूत्रों के हवाले से खबर थी कि फिल्म का इतना बुरा हाल नहीं होता अगर गोवारिकर यूटीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ रॉय कपूर तथा उनकी टीम के क्रिएटिव विचारों को मान लेते।
आशुतोष का अडियल रवैया बना फ्लॉप की वजह!
यूटीवी के सूत्रों ने आरोप लगाया कि आशुतोष फिल्म के ट्रेलर बनने के दिनों से ही अड़ियल रवैया अपनाए हुए थे। ट्रेलर देख कर यूटीवी की टीम एकमत थी कि इससे दर्शक कतई प्रभावित नहीं होंगे। बदलाव करने की जरूरत है। परंतु आशुतोष और उनकी टीम ने एक नहीं सुनी। वही हुआ जिसका डर था।
ट्रेलर ने दर्शकों पर असर नहीं डाला। तभी बातें होने लगी कि इस फिल्म में प्रभावित करने वाला जादू नहीं है। इससे भी बड़ी समस्या यह थी मोहेंजो दारो के साथ अक्षय कुमार स्टारर रुस्तम रिलीज हो रही थी। उसके ट्रेलर को लोगों ने मोहेंजो दारो से बेहतर माना था। बताया जाता है कि पहला ट्रेलर नाकाम होने के बाद यूटीवी ने गोवारिकर से दूसरा ट्रेलर रिलीज करने को कहा था परंतु वह नहीं माने। उन्होंने सिद्धार्थ की टीम के सुझावों को रचनात्मक दखलंदाजी कह कर खारिज कर दिया।
ये आरोप सामने आने के बाद अब गोवारिकर खेमे में चुप्पी तोड़ी है। उससे जुड़े सूत्रों ने ट्रेलर पर विवाद की बात को ही खारिज कर दिया है। गोवारिकर कैंप के दावे को मानें तो आशुतोष ने ट्रेलर तैयार ही नहीं किया बल्कि इसे यूटीवी ने एक पेशेवर एजेंसी से तैयार कराया था। गोवारिकर इस बात से बेहद नाराज थे कि उनके द्वारा बनाई गई फिल्म का ट्रेलर तक उन्हें तैयार नहीं करने दिया गया। नतीजा यह कि उन्होंने यूटीवी के प्रमोशन कैंपेन से खुद को अलग कर लिया और फिल्म को निजी टीम के साथ प्रमोट करने की कोशिश की। जिसका नतीजा अच्छा नहीं आया।
40 से 50 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा
बताया जा रहा है कि यूटीवी ने एक कंपनी ट्रिगर हैप्पी एंटरटेनमेंट को फिल्म का ट्रेलर बनाने का काम दिया था। आशुतोष ने इस पर विरोध भी जताया मगर स्टूडियो ने एक नहीं सुनी। स्टूडियो ने उन्हें साफ कहा कि इस मामले में दखल न दें और सिर्फ फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन पर ध्यान दें। स्टूडियो ने गोवारिकर के इस तर्क को भी दरकिनार कर दिया कि उनकी पत्नी सुनीता भी फिल्म की प्रोड्यूसर है।
सूत्र बताते हैं कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत हिंदी पट्टी में फिल्म के प्रमोशन का काम यूटीवी को देखना था। अतः फिल्म पूरी होते ही यूटीवी ने गोवारिकर को हाशिये पर डाल दिया। इसके बाद जब बाहरी कंपनी द्वारा तैयार ट्रेलर सामने आया तो लोग हैरान रह गए। इसमें उन्हें विशेष आकर्षण नहीं दिखा। यह कंपनी इससे पहले हमशकल्स, इक्कीस तोपों की सलामी और कुछ कुछ लोचा है जैसी फ्लॉप तथा पीके, किक तथा बदलापुर जैसी सफल फिल्मों के ट्रेलर बना चुकी है।
गोवारिकर खेमे के जवाबी हमले के बाद तस्वीर यही बन रही है कि स्टूडियो की फिल्म को प्रमोट करने की रणनीति नाकाम रही। यदि फिल्म सही ढंग से दर्शकों के बीच लाई गई होती तो घाटा कुछ कम हो सकता था। ट्रेड के जानकारों का कहना है कि टिकट खिड़की के वर्तमान कलेक्शन को देखते हुए मोहेंजो दारो के निर्माताओं को 40 से 50 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।