मजरूह के बेटे अंदलीब सुल्तानपुरी स्वीकार करेंगे सम्मान
यह पुरस्कार मंगलवार 24 दिसंबर को बांद्रा के रंगशारदा सभागार में शाम साढ़े छह बजे वितरित होंगे। मुंबई भाजपा अध्यक्ष तथा प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने शुक्रवार को यह घोषणा की। शेलार ने बताया कि स्पंदन संस्था की तरफ से मोहम्मद रफी की जयंती पर उनकी याद में संगीत क्षेत्र के वरिष्ठ कलाकार को जीवन गौरव व मोहम्मद रफी पुरस्कार दिया जाता है। यह मोहम्मद रफी का जन्म शताब्दी वर्ष है। मजरूह के बेटे अंदलीब सुल्तानपुरी यह पुरस्कार स्वीकार करेंगे।
पेशे से हकीम थे मजरूह सुल्तानपुरी
इससे पहले संगीतकार आनंदजी, गायक अमित कुमार, वरिष्ठ गायिका आशा भोसले, सुरेश वाडकर, सोनू निगम, संगीतकार रवि, शैलेंद्र सिंह, नौशाद अली समेत कई नामचीन कलाकारों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। मजरूह सुल्तानपुरी की बात करें तो वे सुल्तानपुर के रहने वाले थे। उनका जन्म 1 अक्तूबर 1919 को आजमगढ़ के निजामाबाद में हुआ था। शायर, गजलकार और गीतकार बनने से पहले वे पेशे से हकीम थे। शायरी का शौक उन्हें मायानगरी ले आया और फिर इस तरह सिनेमा को एक प्रतिभाशाली गीतकार मिला। 'ओ मेरे दिल के चैन...', 'यूं तो हमने लाख हंसी देखे हैं, तुम सा नहीं देखा...', 'देखो जी सनम हम आ गए..,' 'मोहब्बत से तेरी खफा हो गए हैं...', 'चला जाता हूं किसी की धुन में तड़पते दिल के तराने लिए...','सिर पे टोपी लाल...', 'करके आंखों में...',;छोड़ दो आंचल जमाना क्या कहेगा...'! आदि सहित मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे फिल्मी गानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।
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