62 साल के हो चुके मिथुन चक्रवर्ती की खासियत उनकी वर्सेटाइल ऐक्टिंग है। हीरो जैसा चेहरा-मोहरा न होने के बावजूद मिथुन चक्रवर्ती ने हर उस भूमिका को निभाया जो किसी भी कलाकार के लिए सपने जैसी होती है।
मिथुन चक्रवर्ती ने ‘मृगया’ से लेकर ‘ओएमजी’ तक हर फ़िल्म में अपनी एक छाप छोड़ी। यानि मिथुन स्टाईल। कई सुपरस्टार के बीच भी काम करके मिथुन चक्रवर्ती यह एहसास कराते रहे कि कुछ भूमिकाएं सिर्फ वही कर सकते हैं।
अस्सी के शुरुआती दशक में पारिवारिक फिल्में करने के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी फिल्म स्टाईल बदली। इसी दशक के बीतते-बीतते जब इंडस्ट्री मारधाड़ और हिंसा से भरी फिल्मों की ओर चल पड़ी तो मिथुन चक्रवर्ती ऐसी फिल्मों के बड़े हीरो बने।
वह वन मैन आर्मी की तरह एक्शन फिल्में करते। 90 के बाद मिथुन ने एक नयी परंपरा शुरू की। मिथुन के बारे कहा जाता है कि मिथुन एकमात्र ऐसे प्रोड्यूसर थे जिन्होंने फिल्म प्रक्रिया से जुड़े कई लोगों को नौकरी पर रखा था।
वह निर्देशक से लेकर कैमरामन से प्रति फिल्म का नहीं बल्कि एक साल का करार करते। एक साल में उनके बैनर से कई फिल्में बनकर आ जातीं। इन फिल्मों के हीरो मिथुन रहते और बाकी की स्टारकास्ट बिल्कुल नयी।
उनके बैनर में बनने वाली यह सभी फिल्में लार्जर दैन लाइफ की कैटेगरी में थीं। इन फिल्मों में मिथुन ऐसा अजीबो-गरीब एक्शन करते जो सही तो नहीं लगता लेकिन दर्शकों का उसमें खूब मनोरंजन होता।
छोटे शहरों और कस्बों में मिथुन चक्रवर्ती प्रिय हीरो बनकर निकले। ऐसा हीरो जो 70 के दशक का अमिताभ बच्चन था। मिथुन चक्रवर्ती को गरीबों का अमिताभ बच्चन भी कहा गया। सिनेमा हाल में सबसे आगे वाली कुर्सियों में बैठने वाले दर्शकों के लिए मिथुन से बड़ा कोई सुपरस्टार नहीं था।
ये मिथुन की व्यावसायिक चतुराई थी कि इस बीच उन्होंने वो फ़िल्में भी हाथ से नहीं जानें दी जिनमें उन्हें साइड हीरो की भूमिका मिल रही थी लेकिन अभिनय का अवसर था। पुरानी वाली ‘अग्निपथ’ के नारियल वाले से लेकर ‘गुरु’ के संपादक तक हर फ़िल्म में उन्होंने अपनी भूमिका को यादगार ही बनाए रखा।
मिथुन चक्रवर्ती अभी भी सक्रिय हैं। 2012 में रिलीज हुई उनकी तीन फिल्में 'ओएमजी', 'खिलाड़ी 786' और 'हाउसफुल 2' सुपरहिट रहीं। 21 जून को मिथुन एक बार 'एनेमी' फिल्म से अपनी एक्शन इमेज की वापसी कर रहे हैं।