मसाला फिल्मों से दर्शकों का दिल जीतने की कोशिश करने वाली हिंदी फिल्मों को पत्रकारिता इन दिनों खासी लुभा रही है। बॉलीवुड में एक के बाद एक ऐसी फिल्मों का बनना जारी है जिसमें मुख्य किरदार को पत्रकार दिखाया जा रहा है।
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वैसे खास बात यह कि बॉलीवुड प्रिंट के बजाय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को तरजीह दे रहा है। सिल्वर स्क्रीन पर बॉलीवुड स्टाइल की पत्रकारिता का जलवा है लेकिन अहम बात ये है कि इक्का-दुक्का को छोड़ दें तो ज्यादातर फिल्मों के हाथ नाकामयाबी ही लग रही है। सलमान खान के नाम का सहारा लेने वाली हालिया फिल्म ‘ओ तेरी’ बॉक्स इसका सबसे ताजा नमूना है।
फिल्म के दो मुख्य किरदार पुलकित सम्राट और बिलाल अमरोही टीवी रिपोर्टर हैं लेकिन कॉमेडी और पत्रकारिता का ये कॉकटेल दर्शकों के दिलों में उतरने में नाकाम रहा।
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पहले पिटी थी एक फिल्म
थोड़े दिनों पहले कुछ ऐसा ही हाल हुआ था सोहा अली खान और शरमन जोशी स्टारर ‘वार छोड़ न यार’ का। फिल्म में सोहा वार रिपोर्टर का किरदार निभा रही थीं और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी। इस नाकामी से सोहा इतनी आहत हुई थीं कि कुछ दिनों तक उन्होंने लोगों से मुलाकात बंद कर दी थी।
इंडस्ट्री में ऐसी फिल्मों की फेहरिस्त लंबी है जिनमें पत्रकारिता खासतौर पर टीवी पत्रकारिता की पृष्ठभूमि रही लेकिन फिल्म बेअसर साबित हुई। इसकी वजह बड़े पर्दे पर टीवी पत्रकारिता को सतही तरीके से पेश किया जाना भी है। बॉलीवुड की हालिया कहानियों में पत्रकारिता को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
कुछ अच्छी फिल्में भी बनीं थीं
फूहड़ कॉमेडी के नाम पर टीवी रिपोर्टरों को मजाक उड़ाया जा रहा है। दिलचस्प बात ये है कि पत्रकारिता को सही तरीके से पेश करने वाली फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर सराहना भी मिली है। इसमें मधुर भंडारकर की ‘पेज 3’ और रितिक रोशन-प्रिटी जिंटा की ‘लक्ष्य’ शामिल हैं। ‘पेज 3’ में कोंकणा सेन शर्मा ने प्रिंट पत्रकार को रोल निभाया था जिसे खासा पसंद किया गया।
‘लक्ष्य’ में प्रिटी ने वार रिपोर्टर का किरदार निभाया था। कोंकणा ने बाद में फिल्म ‘वेक अप सिड’ में भी टेबुलाइड पत्रकारिता में जगह बनाने की कोशिश कर रही जर्नलिस्ट का रोल भी खूबसूरती से निभाया था। वहीं ऋतिक स्टारर ‘कृष’ फिल्मों में प्रियंका चोपड़ा टीवी रिपोर्टर हैं। वह फिल्म ‘दोस्ताना’ में भी एक फैशन पत्रिका में काम करती दिखी हैं।
नो वन वल्ड किल्ड जेसिका भी
‘नो वन किल्ड जेसिका’ टीवी रिपोर्टिंग की दुनिया पर बनी विश्वसनीय फिल्मों में से एक है। मॉडल जेसिका लाल की हत्या पर बनी इस फिल्म में रानी मुखर्जी ने एक टीवी जर्नलिस्ट का किरदार निभाया था। बॉलीवुड की इस कहानी को पत्रकारिता के असली ताने-बाने में पिरोया गया था और यही वजह रही की फिल्म को न सिर्फ समीक्षकों की तारीफ मिली बल्कि बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का प्यार भी मिला।
जरूरी नहीं कि टीवी जर्नलिज्म पर्दे पर फायदे का सौदा हो। ‘सीरियल किसर’ इमरान हाशमी की फिल्म ‘रश’ ने बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांगा था। इसमें इमरान क्राइम रिपोर्टर थे। फिल्म के प्रमोशन में उन्होंने दावा किया गया था कि इस रोल के लिए उन्होंने रिपोर्टरों की लाइफ स्टाइल पर काफी रिसर्च की, लेकिन फिल्म में उन्हें देखने से ये स्पष्ट हो गया कि ऐसा नहीं है।
अमिताभ की फिल्म भी
टेलीविजन पत्रकारिता की अंदरूनी हकीकत पर बनी अहम फिल्मों में रामगोपाल वर्मा द्वारा सुपर स्टार अमिताभ बच्चन को लेकर बनाई ‘रण’ बॉक्स पर एक और बुरी तरह से विफल फिल्म है। रामू ने फिल्म में टीवी पत्रकारिता की अंदर की बातों को उजागर करने की कोशिश की थी।
प्रकाश झा की चर्चित फिल्म ‘सत्याग्रह’ का हाल भी कुछ ऐसा हुआ था। फिल्म में करीना कपूर खान टीवी रिपोर्टर थीं लेकिन उनके किरदार को जिस तरह से टीवी रिपोर्टर से ज्यादा आंदोलकारी बना दिया गया वो शायद दर्शकों को हजम नहीं हुआ।
मीडिया पर व्यंग्य भी
मीडिया पर बनी फिल्मों की बात निकले और ‘पीपली लाइव’ का जिक्र न आए कैसे हो सकता है। आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तले बनी इस फिल्म ने टीवी पत्रकारिता में टीआरपी की भूख को पेश किया था।
जिसे दर्शकों की सराहना मिली। ‘पीपली लाइव’ के बाद भी ऐसी ही कई दूसरी फिल्में भी बनीं लेकिन किसी को इस तरह की सफलता नहीं मिल सकी।
*मि.एंड मिसेज 55 (1955) : गुरुदत्त की इस फिल्म में एक कार्टूनिस्ट की नजर से मीडिया की दुनिया को देखने की कोशिश थी। फिल्म में दिखाए गए कार्टून विख्यात कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण ने बनाए थे। *नया दौर (1957): यह संभवतः पहली फिल्म थी जिसमें विकास और विस्थापन जैसे गंभीर मामले में मीडिया की भूमिका दिखाने की कोशिश थी। यहां जॉनी वॉकर पत्रकार थे। हालांकि रोल कॉमिक था। *मशाल (1984): यह फिल्म दिलीप कुमार की यादगार भूमिकाओं में से है। वह यहां सच्चाई के लिए लड़ने वाले एक समाचार पत्र के संपादक हैं। फिल्म में मीडिया के कामकाज को दिखाने की कोशिश थी। *मैं आजाद हूं (1989): फिल्म में अखबार का सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए एक पत्रकार द्वारा गढ़े गए किरदार की कहानी सामने आती है और फिर हकीकत में बदल जाती है। शबाना आजमी इसमें पत्रकार हैं। *मोहरा (1994): यहां नसीरूद्दीन शाह मीडिया मुगल हैं। यह अपराध जगत की कहानी है। इसमें रवीना टंडन नसीर के मोहरे की तरह काम करती हैं। इसका गीत ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ जबर्दस्त हिट था।