साल 1983 में रिलीज हुई फिल्म 'मासूम' आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोरा, बल्कि बाल कलाकारों के अभिनय की भी मिसाल पेश की। अब चार दशक बाद अभिनेता जुगल हंसराज ने फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने शबाना आजमी के अभिनय की गहराई को एक नए नजरिए से सामने रखा है।
शबाना ने जुगल हंसराज से बनाई दूरी
जुगल हंसराज ने 'पिंकविला' से बात करते हुए हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि मासूम की शूटिंग के दौरान शबाना आजमी उनसे एक खास दूरी बनाकर रखती थीं। उस वक्त जुगल एक बाल कलाकार थे और शबाना फिल्म में उनकी सौतेली मां की भूमिका निभा रही थीं। जुगल के मुताबिक, सेट पर वह अक्सर यह महसूस करते थे कि शबाना जी उनसे ज्यादा घुलती-मिलती नहीं थीं, जबकि दूसरी दो बाल कलाकारों- उर्मिला मातोंडकर और आराधना के साथ उनका व्यवहार काफी आत्मीय था।
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सच पता चला तो हुई हैरानी
शुरुआत में जुगल को यह बात समझ नहीं आती थी। उन्हें लगता था कि शायद उनके साथ कुछ अलग व्यवहार किया जा रहा है। लेकिन समय के साथ उन्हें इस दूरी की असली वजह समझ में आई। जुगल ने बताया कि शबाना आजमी ने जानबूझकर यह भावनात्मक फासला बनाए रखा था ताकि पर्दे पर उनके रिश्ते की असहजता पूरी सच्चाई के साथ दिखाई दे सके।
फिल्म 'मासूम' की कहानी
दरअसल, मासूम की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक बच्चे की अचानक एंट्री से रिश्तों में तनाव पैदा हो जाता है। शबाना का किरदार इस बच्चे को अपनाने की कोशिश करता है, लेकिन अंदरूनी संघर्ष साफ झलकता है। जुगल के अनुसार, शबाना नहीं चाहती थीं कि सेट पर जरूरत से ज्यादा अपनापन हो, क्योंकि वह भावनात्मक दूरी कहानी की आत्मा थी। जुगल हंसराज ने शबाना आजमी की इस प्रक्रिया को खूबसूरती से निभाया गया अभिनय का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दर्शकों को जो असहजता और ठंडापन स्क्रीन पर महसूस हुआ, वही फिल्म को इतना प्रभावशाली बनाता है। यही वजह है कि मासूम आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती है।
शेखर कपूर के निर्देशन में बनी थी फिल्म
फिल्म मासूम शेखर कपूर के निर्देशन की पहली फिल्म थी और यह एरिक सेगल के उपन्यास पर आधारित थी। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, सईद जाफरी, तनुजा और सुप्रिया पाठक जैसे मंझे हुए कलाकार भी नजर आए। यही फिल्म जुगल हंसराज, उर्मिला मातोंडकर और आराधना की बतौर बाल कलाकार पहली पहचान बनी।आज जहां शबाना आजमी अपने दमदार और गंभीर किरदारों के लिए जानी जाती हैं, वहीं जुगल हंसराज भी अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन में सक्रिय हैं।