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पाकिस्तानी नहीं देख पाए हमारी ये बड़ी फिल्में

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पाकिस्तान में कई भारतीय फिल्में किसी ना किसी वजह से बैन होती रही हैं। इन दिनों रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी’ को पाकिस्तान में बैन किया गया है। यह फिल्म ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर आधारित है।
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पाकिस्तान सेंसर बोर्ड अपनी शर्तों पर पाकिस्तान में फिल्में रिलीज करने के लिए जाना जाता है। उसे ‘मर्दानी’ से भी काफी शिकायतें रहीं। बोर्ड ने फिल्म के सात बड़े सीन कट करने के लिए कहा था और कई दूसरे सीन्स को धुंधला करने के लिए कहा था।

जबकि फिल्म की क्रिएटिव टीम का मानना था कि अगर वे सीन कट किए गए, तो फिल्म की आत्मा के साथ खिलवाड़ होगा। इस तरह पाकिस्तान में फिल्म बैन हो गई।

एक था टाइगर भी हुई थी बैन

'मर्दानी' से पहले भी पाकिस्तान में कई फिल्में बैन हुई हैं। सलमान खान और कैटरीना कैफ स्टारर फिल्म ‘एक था टाइगर’ पाकिस्तान सेंसर बोर्ड को रास नहीं आई थी। तब बोर्ड ने कहा था कि फिल्म में आईएसआई का उल्लेख ऐसे संदर्भों में किया गया है, जिससे जनभावना को ठेस पहुंच सकती है।

इसी आधार पर सैफ अली खान की फिल्म 'एजेंट विनोद' को भी बैन किया गया था, जिसे सैफ ने शर्मनाक बताया था। फिल्म ‘तेरे बिन लादेन’ को सिर्फ उसके शीर्षक की वजह से पाकिस्तान में रिलीज नहीं होने दिया गया। वहीं सोनम कपूर और धनुष स्टारर फिल्म 'रांझणा’ को हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी दिखाने के लिए बैन किया गया।
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ये बड़ी फिल्में भी रिलीज नहीं

'खिलाड़ी 786', फिल्म भी अपने नाम की वजह से पाकिस्तान में रिलीज नहीं हुई। यह अंक मुस्लिम समुदाय में पवित्र अंक माना जाता है और बोर्ड को डर था कि फिल्म के नाम से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस लगेगी।

भारत के सुप्रसिद्ध एथलीट मिल्खा सिंह की बायोग्राफिकल फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लग गया था, क्योंकि फिल्म के एक सीन में मिल्खा सिंह पाकिस्तान जाने से इनकार करते हैं।

2010 में किक बॉक्सिंग पर बनी एक संजीदा फिल्म 'लाहौर' को भी पाकिस्तान में बैन कर दिया गया। हालांकि बैन के बावजूद इंडियन सिनेमा को पाकिस्तान में धड़ल्ले से देखा जाता है और इसका बड़ा दर्शक वर्ग है। एक गाना भी तो यही कहता है-पंछी, दरिया और पवन के झोंके...कोई सरहद ना इन्हें रोके।
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