जॉन अब्राहम की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'मद्रास कैफे' राजनीति की भेंट चढ़ सकती है। तमिल संगठनों ने यह फिल्म देख ली है। इसके बाद संगठनों की तरफ से इस बात के सुर तेज हो गए हैं कि वे यह फिल्म चलने नहीं देंगे।
जॉन अब्राहम की फिल्म ‘मद्रास कैफे’ इस शुक्रवार को रिलीज होने जा रही है। वह फिल्म के हीरो भी हैं और प्रोड्यूसर भी। फिल्म श्रीलंका की तमिल समस्या के परिदृश्य में बनाई गई है और जॉन डर रहे हैं कि कहीं उनकी फिल्म का राजनीतिक विरोध न हो।
पिछले दिनों जब वह चेन्नई गए थे, तो कुछ संगठनों ने उनके और फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अब फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन को भी पर्दे पर दिखाने की बात सामने आ रही है।
ऐसे में जॉन ने किसी विवाद से बचने के लिए पहले ही साफ कर दिया है कि उनकी फिल्म युवाओं में राजनीतिक चेतना को पैदा करने के लिए बनाई है। उन्होंने कहा कि फिल्म केवल मनोरंज के लिए नहीं है।
जॉन के अनुसार, ‘मद्रास कैफे का किसी पार्टी, किसी धर्म या किसी समूह से कोई संबंध नहीं है, चाहे वे राजनीतिक हों या विद्रोही। हमने एक ईमानदार फिल्म बनाई है, जो किसी का पक्ष नहीं लेती। बल्कि हकीकत को सामने रखती है।
हमें सेंसर बोर्ड ने भी बिना विवाद के प्रमाण पत्र जारी किया है। यह एक सच्चा राजनीतिक थ्रिलर है। जिसे हमें देश के अतीत से प्रेरणा लेकर बनाया है... और आज हर युवा को जानना चाहिए कि 1980 के आखिरी दिनों और 1990 के शुरुआती दिनों में देश के क्या हालात थे।