माधुरी और तृप्ति को एक साथ फ्रेम में देखना स्कूल में होने जैसा
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि कोई भी एक्टर बारीकियों को समझने और हर सीन को पूरी तरह से सही बनाने के लिए हमेशा अपने को-एक्टर्स पर निर्भर रहता है। जब आप माधुरी मैम और तृप्ति के साथ एक ही फ्रेम में होते हैं, तो सेट पर ऐसा लगता है जैसे आप फिल्म स्कूल में हों।
हर दिन मैं कुछ नया सीखती थी, उनके काम करने के तरीके से कुछ ऐसा पता चलता था जो मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता था। खासकर जब कॉमेडी की बात आती है, तो हर बीट और टाइमिंग को सही रखना बहुत ज़रूरी हो जाता है; मुझे लगता है कि उन दोनों से सीखी गई यही बात मेरे लिए सबसे बड़ी सीख रही।
को-एक्टर्स के सपोर्ट ने सबकुछ आसान बना दिया
मुख्य कलाकारों में सबसे नई सदस्य होने के बावजूद, धरना कहती हैं कि उन्हें कभी भी घबराहट महसूस नहीं हुई क्योंकि उनके को-एक्टर्स ने पूरे शूट के दौरान एक उत्साहजनक माहौल बनाए रखा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि उदार और मिलनसार एक्टर्स की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि वे हमेशा कहानी और सीन की दिशा को अपनी पहली प्राथमिकता मानते हैं।
इसलिए जब हम तीनों इस बात पर सहमत थे, तो मुझे लगता है कि काम की गति पकड़ना बहुत आसान हो गया। सच कहूं तो, उनके दिल बहुत बड़े हैं, वे बहुत उदार हैं। मुझसे कहीं ज्यादा अनुभव होने के बावजूद, मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वे मुझे अपने बराबर नहीं समझते; इसके लिए मैं बहुत आभारी हूँ, क्योंकि इससे मुझ पर से काफी दबाव कम हो गया।