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Exclusive: गोविंदा के गाने लिखते वक्त इस बात का ध्यान रखते थे समीर अंजान, एक्टर के डाउनफॉल पर कही ये बात

Wed, 22 Apr 2026 10:22 AM IST
संदेश मेहरा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Sameer Anjaan Interview: 'हम प्यार करने वाले..' और  'ऐसी दीवानगी देखी..' समेत 90 के दशक में कई गाने लिखने वाले गीतकार समीर अंजान ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने एक्टर गोविंदा के करियर में आए डाउनफॉल पर भी खुलकर बात की।

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गोविंदा और समीर अंजान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मशहूर गीतकार समीर अंजान ने हाल ही में अमर उजाला के साथ संगीत और बॉलीवुड इंडस्ट्री को लेकर खास चर्चा की। इस बीच उन्होंने म्यूजिक के बदलते दौर, फिल्में, पुराने गानों से लेकर जेन जी के आज के जमाने के गानों पर विचार शेयर किए। साथ ही उन्होंने एक्टर गोविंदा को लेकर भी बड़े बयान दिया है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा। 

गोविंदा के लिए कई गाने लिख चुके हैं समीर

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समीर अंजान ने अपने करियर में गोविंदा के लिए कई गाने दिए है। उनके कुछ गाने जैसे- ‘यूपी वाला ठुमका लगाओ’, ‘सरकाइलो खटिया जाड़ा लगे’ काफी पॉपुलर हुए। गोविंदा के साथ काम करने के सवाल पर समीर ने कहा, ‘गोविंदा में यूपी का रंग भरा हुआ था। ये गाना अगर सलमान या शाहरुख को दिया होता, तो बात नहीं बनती। गोविंदा उस मिट्टी से थे, और जब वे परफॉर्म करते हैं, तो पूरा जीकर परफॉर्म करते हैं।

जब मैं गोविंदा के लिए गाना लिखता हूं, तो मेरे दिमाग में उनका एक-एक मूमेंट चलता रहता है, जैसे उनकी बॉडी लेंग्वेज और बात करने का तरीका। बाकी एक्टर्स जैसे सलमान और शाहरुख का रंग है, लेकिन सीमित है। इसीलिए बाकी एक्टर्स के लिए मुझे इतना सोचना नहीं पड़ता है। लेकिन गोविंदा पैदाइशी एक्टर और डांसर हैं।’

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गोविंदा और समीर अंजान - फोटो : अमर उजाला
गोविंदा के डाउनफॉल पर क्या बोले समीर?
गोविंदा के करियर में चल रहे डाउनफॉल को लेकर समीर ने कहा, ‘ये बहुत दुखद है। इसी को कहते हैं वक्त का तकाजा। ना तो उसकी गलती है, ना किसी की गलती है। ये सब वक्त का खेल है। आज भी वो आदमी काम करे, तो उसके सामने किसी को खड़े होने की हिम्मत नहीं है। मगर अब नहीं हो रहा। उसमें किसी का दोष भी नहीं है, कोई कुछ कर भी नहीं सकता, लेकिन दुख होता है।

हम तो उसके परिवार जैसे हैं। एक वक्त था जब हर शाम या तो उसके मामा के साथ या उसके घर गुजरती थी। पहली फिल्म उसकी शुरू करवाने वाले मैं और आनंद मिलिंद थे। उसको हम लोगों ने करीब से समझा है।

ऐसा लगता था घर का कोई बच्चा है। ऐसे लोगों के साथ जब ये सब होता है, तो कहीं दुख भी होता है। मैंने एक दो बार मिलकर समझाया भी था, लेकिन बात करके लगा कि इसका वक्त गड़बड़ चल रहा है। वो अद्भुत और नेचुरल एक्टर है। 

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