बशीर बद्र और मीना कुमारी
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अपनी डायरी में बशीर बद्र के शेर लिखती थीं मीना कुमारी
मीना कुमारी जो खुद भी शायरी करती थीं और उनका उपनाम नाज था। वो बशीर बद्र की शायरी की काफी बड़ी फैन थीं। वो अपनी तन्हाई के समय में बशीर बद्र के शेर सुना करती थीं और उन्हें लिखा करती थीं। 1960 के दशक में बशीर बद्र का एक शेर बहुत लोकप्रिय हुआ था। मीना कुमारी को वह शेर इतना पसंद आया कि उन्होंने उसे अपने हाथों से लिखकर एक मशहूर मैगजीन को छपने के लिए दे दिया। ये शेर था-
‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।’
इसके अलावा मीना कुमारी अपनी निजी डायरी में भी बशीर बद्र के शेर लिखा करती थीं।
देवदास फिल्म में नुसरत बद्र ने लिखे गाने
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बशीर बद्र के बेटे ने लिखे ‘देवदास’ समेत कई फिल्मों के गाने
इसके अलावा बशीर बद्र एक अन्य तरीके से भी सिनेमा से जुड़े रहे। बशीर बद्र के बेटे व गीतकार नुसरत बद्र ने बॉलीवुड में कई फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। उन्हें सबसे बड़ी सफलता संजय लीला भंसाली की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'देवदास' से मिली। इस फिल्म के सभी यादगार गानों को नुसरत बद्र ने ही लिखा है। इनमें 'डोला रे डोला', 'सिलसिला ये चाहत का' और 'मार डाला' जैसे गीत शामिल हैं।