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Ladki The Dragon Girl Review: श्रीदेवी जैसी तलाशने की रामू की एक और कोशिश, पढ़िए क्या है इस बार का ताना बाना

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लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
लड़की: द ड्रेगन गर्ल
कलाकार
पूजा भालेकर , पार्थ सूरी , अभिमन्यु सिंह , तिआन लोंग शी और राजपाल यादव
लेखक
राम गोपाल वर्मा
निर्देशक
राम गोपाल वर्मा
निर्माता
टी नरेश कुमार , श्रीधर टी और जिंग लिउ
रिलीज डेट:
15 जुलाई 2022
रेटिंग
1.5/5

राम गोपाल वर्मा विषयों को लेकर प्रयोगधर्मी फिल्मकार रहे हैं। कॉलेज कैंपस की हिंसा पर बनी फिल्म ‘शिवा’ से लेकर मार्शल आर्ट फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' तक आते आते उन्होंने अपना अधिकतर जीवन सिनेमा के नाम बनाए रखा है। स्त्री चरित्रो को परदे पर पेश करने का उनका अपना एक अलग अंदाज रहा है। श्रीदेवी पर वह लंबे समय तक मोहित रहे। सुंदरता की उनकी हर परिभाषा श्रीदेवी बनकर कैमरे से निकलती है। लेकिन, उनकी पहचान रहा उनका ये अंदाज अब बेडौल हो रहा है। उनका कहानी चुनने का नजरिया फिल्म फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' में भी वैसा ही है जैसा उनकी जिद पर बनी फिल्म ‘राम गोपाल वर्मा की आग’ में रहा। वर्मा की मानें तो मार्शल आर्ट पर फिल्म बनाना राम गोपाल वर्मा का बहुत पुराना सपना रहा है। गोवा के सन्नाटे में उन्हें पूजा भालेकर मिलीं और बनी ये फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल'।

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लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रामू की एंग्री यंग वूमन
फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' इसके मुख्य महिला किरदार के इर्द गिर्द ही घूमती है। कहानी के लिए फिल्म में राम गोपाल वर्मा ने ज्यादा दिमाग नहीं लगाया है। शुरुआत एक रेस्टोरेंट से होती है जहां पर कुछ गुंडे आते है और सामने शार्ट ड्रेस में बैठी लड़की पर भद्दे कमेंट करते है। वहां बैठे नौजवान को बर्दाश्त नहीं होता है। पंगा होता है और लड़के की पिटाई हो जाती है। यहां रामू की हीरोइन एंग्री यंग वूमन बनती है और फिर बाकी पूरी फिल्म में वह वही सब करती रहती है जो दूसरी मसाला फिल्मों का हीरो करता है। यहां तक कि क्लाइमेक्स किडनैप भी हीरो होता है और उसे बचाने हीरोइन निकलती है। बस इतनी सी कहानी है फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' की। बीच में बिल्डर है। उसकी कब्जा करने की कोशिशें हैं। ब्रूस ली की यादें हैं। और, ड्रैगन गर्ल के ड्रामे हैं।

लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

12 मसाले बेस्वाद जायके  
जमीन पर कब्जा, मर्डर और फिर उसका बदला, इस थीम पर अनगिनत फिल्में हिंदी सिनेमा में बन चुकी हैं। फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' में कुछ भी नया नहीं सिवाय इसके कि फिल्म की हीरोइन मार्शल आर्ट्स में परफेक्ट है। पूरी फिल्म में हीरोइन गुंडों को दौड़ाकर मारती रहती है। यह अच्छी बात है कि हर लड़की को अपनी आत्म रक्षा के लिए मार्शल आर्ट आनी चाहिए। महिला सशक्तिकरण को  राम गोपाल वर्मा ने इस फिल्म में पेश करने की कोशिश भी की है। लेकिन महिला सशक्तिकरण की पहली बुनियाद है लड़की का आत्मनिर्भर होना।

लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिस्म की भद्दी नुमाइश
आर्थिक आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने की बजाय ये फिल्म शारीरिक आत्मनिर्भरता की गलियों में भटकती रहती है। रामू अपनी हीरोइन को कामुक अंदाज में पेश करने में माहिर रहे हैं। यहां भी उनके लिए लड़की जीवन का उत्सव नहीं कामुकता का भद्दा प्रदर्शन है। राम गोपाल वर्मा की फिल्मों में समुद्र भी एक किरदार होता है, यहां भी समंदर के सहारे वह जो कुछ कामसूत्र जैसा बना सकते थे, उन्होंने कसर छोड़ी नहीं है। कभी लगता है कि फिल्म 'रंगीला' का कोई सीन कॉपी पेस्ट कर दिया गया है तो कभी लगता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हम 'नाच' देख रहे हें।

लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : twitter

अभिनेताओं का भी खराब अभिनय

राम गोपाल वर्मा की नई खोज मानी जा रही मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी पूजा भालेकर का बतौर मार्शल आर्ट्स आर्टिस्ट काम लाजवाब है। लेकिन, फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' एक फिल्म है और फिल्म के लिए एक अदद कहानी के साथ साथ अभिनय की भी जरूरत होती है, बस यहीं आकर फिल्म बैठ जाती है। पूजा मार्शल आर्ट्स में निपुण हैं और अपना ये काम वह करती भी उम्दा तरीके से हैं। अभिनय उनसे हो नहीं पाता है। और, राम गोपाल वर्मा की तमाम कोशिशें बेकार जाती हैं। लेकिन, ताज्जुब की बात ये है कि जिन्हें फिल्म में अभिनेताओं के नाम पर लिया गया, उन पार्थ सूरी हो और अभिमन्यु सिंह ने भी बहुत ही औसत अभिनय किया है। राजपाल यादव की ओवर एक्टिंग साफ झलकती है। हां, छोटी सी भूमिका में तिआन लोंग शी ने जरूर अपने अभिनय से प्रभावित किया है।

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लड़की: द ड्रेगन गर्ल रिव्यू - फोटो : twitter

फाइनल रिजल्ट

हिंदी सिनेमा में अर्श से फर्श पर सिर्फ अपनी फिल्मों के चलते आने वालों में राम गोपाल वर्मा का नाम हमेशा याद किया जाएगा। फिल्म 'लड़की: द ड्रेगन गर्ल' देखने के बाद यकीन ही नहीं होता कि ये वही राम गोपाल वर्मा हैं जो इतनी बेहतरीन फिल्मे दे चुके है। इस फिल्म में मार्शल आर्ट्स के नाम पर उन्होंने जिस्म की नुमाइश की है। ना तो फिल्म में कहानी अच्छी है। ना निर्देशन में कुछ ताप दिखता है और फिल्म का संगीत ऊपर से और दुखी करता है। संगीतकार रवि शंकर और डीएसआर के गानों में मेलोडी कम और शोर ज्यादा है। एक्शन सीन्स में राम गोपाल वर्मा ने में घोड़े की टापों और ट्रेन की आवाज के साथ प्रयोग करने की कोशिश की है लेकिन मामला जमा नहीं।
       

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