का & की मूवी की प्रमोशन के लिए चंडीगढ़ पहुंचे अर्जुन कपूर
रोचक आइडिये कभी मरते नहीं। 30 साल पहले विख्यात निर्देशक बासु चटर्जी ने फिल्म की एंड का जैसे आइडिये को पर्दे पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी। मगर फिल्म बन न सकी। अब आर।बाल्कि समाज में स्त्री-पुरुष की बदलती भूमिका पर फिल्म ला रहे हैं।।।
छोटी सी बात, चितचोर, रजनीगंधा, प्यार का घर, खट्टा-मीठा, बातों बातों में और शौकीन जैसी मध्यमवर्गीय जीवनशैली की शानदार फिल्मों के निर्देशक बासु चटर्जी और उनके सहायक/लेखक के बीच मतभेद नहीं हुए होते तो घर का कामकाज संभालते पति और नौकरीपेशा पत्नी को लेकर एक फिल्म वह 30 साल पहले बना चुके होते। परंतु आपसी झगड़े की वजह ऐसा नहीं हुआ। निर्देशक आर।बाल्कि अब इसी कथानक पर फिल्म ला रहे हैं, की एंड का।
कहानियों के संकट से जूझ रहे बॉलीवुड में कोई अलग आइडिया दिखता है तो सबकी नजरें उस पर ठहरती हैं। बाल्कि की फिल्म में एक पढ़ा लिखा युवक घर पर रह कर पत्नी की भूमिका निभाता है और पत्नी नौकरीपेशा है। निर्देशक का कहना है कि समय के साथ आर्थिक-सामाजिक तानाबाना बदल रहा है।
परंतु एक समय बासु चटर्जी की फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता और 300 से ज्यादा डॉक्युमेंट्री फिल्में बना चुके देवेंद्र खंडेलवाल कहते हैं कि 30 साल पहले समाज में स्त्री-पुरुष के संबंधों में हो रहे बदलावों को ही रेखांकित करते हुए बासु चटर्जी ऐसी फिल्म बना रहे थे। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में देवेंद्र खंडेलवाल के नाम भारत में सबसे ज्यादा शॉर्टफिल्में बनाने का कीर्तिमान दर्ज है।