केतन मेहता की फिल्मों में आप हर बंधन के विरुद्ध आजादी का संघर्ष दिखेंगे। शुक्रवार को रिलीज होने वाली मांझीः द माउंटेन मैन में भी वह एक बड़ी लड़ाई दिखा रहे हैं। इस फिल्म में पहाड़ तोड़ना कोई मुहावरा नहीं, बल्कि हकीकत है। इस चर्चित फिल्म को लेकर केतन मेहता से बातचीत की रवि बुले ने।
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समानांतर हिंदी सिनेमा के आपके दौर के दिग्गज हाशिये पर चले गए हैं। आप कैसे लगातार फिल्में बना पा रहे हैं? इस वाल पर केतन मेहता कहते हैं, 'मुझे सिर्फ फिल्म बनाना आता है। उसी से सुकून मिलता है। उसी से अर्थ मिलता है। मुझे सिनेमा से खुशी मिलती है। मैं हमेशा ही फिल्में बनाना चाहता हूं। शायद यही कुछ कारण हैं।'
दशरथ मांझी पर फिल्म बनाने का पहला खयाल कब आया? इस पर केतन मेहता कहते हैं '2007 में उनका देहांत हुआ तो कई अखबारों-पत्रिकाओं में लेख छपे। हमारे देश की त्रासदी है कि जब तक कोई जिंदा होता है उसकी कद्र नहीं करते। जब मैंने दशरथ मांझी पर पढ़ा तो आश्चर्य हुआ कि हमारे समय में एक ऐसा आदमी हुआ जिसने 22 साल लगा कर एक पहाड़ काट के रास्ता बना दिया। वह भी प्यार की खातिर! अकेले। छैनी-हथौड़े से।'
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'मैंने पता किया। जब मालूम हुआ कि यह सच्चाई है तो मैं गहलोर गांव (गया, बिहार) पहुंचा और कटे हुए पहाड़ के बीच बना रास्ता देखा। आश्चर्य हुआ कि उस व्यक्ति ने यह कर दिखाया, जबकि कोई पहाड़ देख कर तो सोच भी नहीं सकता। तब खयाल आया कि इस पर फिल्म बनानी चाहिए। उसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया। मुझे यह कहानी बहुत प्रेरक लगी। आज के पागलपन वाले समय में, हमारे युवा को सबसे ज्यादा जरूरत सकारात्मक सोच और प्रेरणा की है।
इस फिल्म के लिए हमें कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़े
फिल्म की कहानी के लिए कॉपीराइट पर केतन ने बताया, 'दशरथ की कहानी पर कॉपी राइट का भी झगड़ा था। उस वक्त पांच-छह निर्माता-निर्देशक इस पर फिल्म बनाने की सोच रहे थे। कुछ ने स्क्रिप्ट तैयार कर ली थी। परंतु किसी को एक-दूसरे के बारे में पता नहीं था। हमारी घोषणा होते ही सब बाहर निकल आए।'
केतिन ने बताया कि 'इसके बाद हम दशरथ के बेटे भगीरथ मांझी के पास गए और उनसे फिल्म बनाने की इजाजत मांगी। हम पर कोर्ट केस भी हुआ, फिल्म बनाने के विरुद्ध। अंततः कॉपीराइट और फिल्म बनाने का केस हम जीते।
नवाजुद्दीन अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ ऐक्टर
आपने 2007 में फिल्म बनाना तय किया था। तब नवाज कैसे फिल्म में आए? इस पर केतन कहते हैं 'नवाज अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ ऐक्टर हैं, इसमें अब कोई संदेह नहीं रह गया है। उनका कद- काठी दशरथ मांझी से इतना मिलता है कि वह रोल के लिए परफेक्ट थे।'
दशरथ मांझी की आंखों में जो चमक थी, वह नवाज की आंखों में है। इन सबसे बढ़ कर नवाज भी अपनी जिंदगी के माउंटेन मैन हैं। उन्होंने 15 साल संघर्ष करके बॉलीवुड का पहाड़ तोड़ अपना रास्ता बनाया है।
बॉक्स ऑफिस एक बड़ा पैमाना बन गया है। माउंटेन मैन हो या रंग रसिया इन्हें भी इसी कसौटी पर कसा जाता है! इस पर केतन कहते हैं, मेरे लिए जरूरी है, मेरी कहानी। एक फिल्म में कोई भी मेकर दो-ढाई साल लगाता है।
मैं सोचता हूं कि अगर किसी फिल्म को बनाते हुए व्यक्तिगत रूप से मैं विकसित हो पा रहा हूं तो उस फिल्म में लगता हूं। आप ईमानदारी से देखें तो पाएंगे कि जिंदगी पैसों से कहीं बड़ी है। ऐसे में आप जो कर रहे हैं उसमें ही सबसे पहले और सबसे ज्यादा भरोसा रखना पड़ता है।
आपकी अगली फिल्म झांसी की रानी की चर्चा में है। कब आएगी यह फिल्म? इस पर केतन मेहता कहते हैं 'इसकी तैयारियां चल रही है और अगले साल हम इसकी शूटिंग शुरू करेंगे। फिल्म 2017 में आएगी।' फिल्म में झांसी की रानी के किरदार को लेकर कंगना रनौत के नाम की चर्चा है।
फिल्म नहीं लेकिन झांसी की रानी के किरदार को लेकर क्या कह सकेंगे? इस पर भी मेहता जवाब नहीं देते उनका कहना है 'कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इतना ही कहूंगा कि झांसी की रानी विश्व के इतिहास में सबसे अलग और आकर्षक व्यक्तित्व हैं। उनके जैसा अद्भुत किरदार मैंने कहीं नहीं देखा। उनसे लड़ने वाले अंग्रजों ने भी कहा कि वह फ्लोरेंस नाइटेंगिल, क्लियोपेट्रा और एलिजाबेथ का मिला-जुला व्यक्तित्व हैं।'