हरियाणा की पटौदी रियासत को नई बेगम करीना कपूर मिल गई है। सैफीना से पहले पटौदी खानदान में उनके दादा इफ्तिखार अली खान ने भी भोपाल के नवाब की बेटी साजिदा सुलतान से लव मैरिज की थी। शादी के बाद साजिदा सुलतान ने पटौदी गांव आने से इसलिए इंकार कर दिया था, क्योंकि यहां उनकी पसंद का महल नहीं था। बेगम को ससुराल लाने के लिए ही सफेद कोठी का निर्माण कराया गया था।
पटौदी रियासत के दसवें नवाब सैफ अली खान फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर से मंगलवार को विवाह बंधन में बंध गए। मूल रूप से पटौदी गांव के निवासी और मुजफ्फरनगर में तेल का कारोबार करने वाले 85 वर्षीय लीलूराम के जेहन में नवाब खानदान की सैकड़ों यादें हैं। उन्होंने बताया कि पटौदी के आठवें नवाब इफ्तिखार अली शानदार क्रिकेटर थे। 1946 में इंग्लैंड गई इंडियन नेशनल क्रिकेट टीम की कमान उन्हें ही सौंपी गई थी। भोपाल के तत्कालीन नवाब हमीदुल्ला की दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान इफ्तिखार के खेल से बेहद प्रभावित हुईं। प्यार के बाद दोनों ने शादी रचा ली। साजिदा के पिता हमीदुल्ला इस शादी के सख्त खिलाफ थे।
बहुत कम लोग जानते हैं कि साजिदा ने शादी के बाद पटौदी आने से इसलिए इंकार कर दिया था, क्योंकि यहां उनके रहने के लिए पसंदीदा महल नहीं था। इसके बाद हेल मंडी पटौदी की स्थापना कर उससे मिलने वाले राजस्व से महल का निर्माण आरंभ कराया गया। बाद में इसी महल को सफेद कोठी के नाम से जाना गया। करीना कपूर जब पटौदी पहुंचेंगी तो इसी महल में उनका खास स्वागत किया जाएगा।
भोपाल और पटौदी का फर्क
असलियत में पटौदी तब केवल 52 गांवों की रियासत थी, जबकि भोपाल बड़ी रियासत थी। साजिदा के पिता हमीदुल्ला धनाढ्य थे। लीलूराम ने बताया कि 1952 में इफ्तिखार के निधन के बाद हमीदुल्ला पहली बार पटौदी आए थे।
पटौदी परिवार से नजदीकियां
शहर के तेल कारोबारी लीलूराम के परिवार की पटौदी खानदान से बेहद नजदीकी रही है। 85 वर्षीय लीलूराम के दादा गौरी प्रसाद नवाब खानदान के नवरत्नों में से एक रहे हैं। स्वयं लीलूराम और स्व. मंसूर अली खान पटौदी रामलीला में एक साथ वानर सेना के खास सिपाही होते थे।