बॉलीवुड अभिनेता 'मंटो' और 'राजी' जैसी फिल्मों का हिस्सा रहे आलोक अरोड़ा वर्तमान में स्ट्रीमिंग शो 'जुबली' में रघु झालानी के किरदार के लिए काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। शो 'जुबली' में उनके किरदार को काफी सराहा गया था। अब हाल ही में, अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने के दौरान वह अपने रास्ते में आने वाली चुनौतियों से बेफिक्र रहते हैं।
छोटी भूमिकाएं करने में कभी शर्मिंदगी नहीं हुई
अपने हालिया इंटरव्यू में आलोक अरोड़ा ने बताया कि उन्हें छोटी भूमिकाएं करने में कभी शर्मिंदगी नहीं हुई और सिनेमा से प्यार करने वाले लोगों के साथ काम करने में उन्हें मजा आया। अभिनेता ने कहा, ‘मैंने बहुत पहले ही अपने दिल से रिजेक्शन लेना बंद कर दिया था, वरना यहां टिके रहना मुश्किल होता। मेरी समझ से भीड़ में होना आपको कहीं नहीं ले जाता है। इसलिए, मैंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से अभिनय का कोर्स पूरा किया और फिर काम की तलाश शुरू कर दी।’
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संघर्षों के बारे में की बात
आलोक ने डिग्री लेने के बाद के अपने संघर्षों के बारे में बताते हुए कहा, ‘जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि एक प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री होने से आपको शुरुआत में मदद मिलती है, जहां कास्टिंग करने वाले लोग फ्रेशर्स पर थोड़ी बढ़त देते हैं, बाकी आगे संघर्ष समान रहता है। हालांकि, मेरी सीख ने मुझे अपने टैलेंट के बारे में और अधिक आश्वस्त कर दिया है और मुझे काम नहीं मिलने के बारे में कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ।’
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सिनेमा से प्यार करने वाले लोगों के साथ काम करना एक ट्रीट है
इंडस्ट्री में एंट्री लेने के वक्त आलोक ने अपनी छोटी मोटी भूमिकाओं के बारे में कहा, 'मुझे अपनी पसंद को लेकर कभी बुरा या शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई क्योंकि मुझे पता था कि यह सब मेरे काम और सीखने का हिस्सा है। मैंने मंटो में एक छोटी भूमिका निभाई क्योंकि मैं नंदिता दास और नवाज़ुद्दीन भाई के साथ काम करना चाहता था। जब उन्होंने फैज अहमद फैज की भूमिका के लिए पहले टेक में मेरा ऑडिशन ओके किया तो मैं सातवें आसमान पर था। सिनेमा से प्यार करने वाले लोगों के साथ काम करना एक ट्रीट है। इसलिए मुझे इस तरह के बड़े कैनवस प्रोजेक्ट्स के लिए किरदार निभाने में हमेशा परेशानी होती है।’