26 जनवरी 1985 को जन्मे दिव्यांग की फिल्मी पढ़ाई वैसे तो क्लासरूम के हिसाब से सुभाष घई के स्कूल व्हिसलिंग वूड्स में हुई है, लेकिन असली पढ़ाई उनकी कैमरे के सामने ही हुई। गुजराती फिल्मों के बाद उन्होंने वेब सीरीज में भी एक्टिंग की और इसी दौरान अपने एक विचार को पटकथा में तब्दील करके वह निर्माता मनीष शर्मा से मिलने पहुंच गए। दिव्यांग अपनी कहानी का सार भी बताने में नहीं हिचकते। वह कहते हैं, “मनोरंजन से परे जाकर हम ये सवाल उठाना चाह रहे हैं कि जोरदार मर्द बनने के लिए आखिर किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है? जयेशभाई जोरदार के जरिए हम हिंदी सिनेमा में हीरो की बरसों से पुख्ता हुई इमेज तोडड़ना चाहते हैं।"
दिव्यांग की बर्थडे विश यही है कि वह अपने ख्यालों को कागज पर उतारने का अनुशासन बनाए रखें और मौलिक कहानियां लिखने व उन्हें विकसित करने के लिए भरपूर समय दे सकें। वह कहते हैं, “जब मैं जयेशभाई जोरदार का लेखन कर रहा था, तब मेरे दिमाग में दूर-दूर तक यह ख्याल नहीं था कि आखिरकार इसे कौन बनाएगा? यह कितने बड़े पैमाने की फिल्म होगी, इसमें कौन-कौन से स्टार काम करेंगे? इसे मैंने बस कहानी रचने के इरादे से लिखा था। इस ईमानदारी और इस रोमांच को मैं अपने भविष्य के काम में भी बनाए रखना चाहूंगा।”