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मुझे फिल्मों में काम देने वाले मुसलमान नहीं थे: जावेद अख्तर

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पिछले काफी समय से देश में धार्मिक भेदभाव और असहिष्णुता की बहस गर्म है। देशभर से बड़ी संख्या में साहित्यकार और बुद्धिजीवियों ने अपना पुरुस्कार लौटाया है। उसमें बॉलीवुड के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
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हाल ही में शाहरुख खान के देश में बढ़ती असहिष्णुता के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने उन पर जबर्दस्त हमला बोला। यहां तक कि उनपर पाकिस्तान से कुछ ज्यादा ही प्यार करने का आरोप भी लगाया। इसके बाद बॉलीवुड के कई नामी-गिरामी निर्देशकों ने अपने पुरस्कार लौटाए।

इंदौर में साहित्यिक मेले में बॉलीवुड के मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर से भी इस बारे में सवाल किया गया। जावेद अख्तर से पूछा गया कि क्या फिल्मी दुनिया में भी धर्म के आधार पर भेदभाव है। साथ ही उनसे ये सवाल भी किया गया कि क्या उन्हें भी भेदभाव का सामना करना पड़ा।
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'मुझे इंडस्ट्री में काम देने वाले मुसलमान नहीं थे'

जावेद अख्तर ने बॉलीवुड में धार्मिक आधार पर भेदभाव की बात पर कहा कि उन्होंने कहा कि वो इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। जावेद ने साफ कहा कि उनको कभी मुसलमान होने की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में कोई परेशानी नहीं हुई।

जावेद अख्तर ने कहा कि वो 20 साल के थे, जब मुंबई आए, उनको काम देने वाले ना उनके परिवार के लोग थे, ना रिश्तेदार थे और ना ही उनके मजहब के लोग। उनसे कभी किसी ने ये सवाल नहीं किया कि वो किस धर्म के मानने वाले हैं। जावेद अख्तर ने कहा कि उनका काम अच्छा लगा तो उन्हें काम मिला।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, जावेद अखतर ने कहा कि मेहनत और लगन से काम किया जाए तो आप भेदभाव के होते हुए भी बेहतर कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हम शायद अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपना कल्चर और तहजीब इस तरह नहीं दे पा रहे हैं, जिस तरह से हमें उन तक पहुंचाना चाहिए था।

जावेद अख्तर ने इंदौर के साहित्यिक मेले में लोगों से मुखातिब होते हुए ये बाते कहीं। उन्होंने दुनियाभर में बढ़ रही दहशतगर्दी पर भी चिंता का इजहार किया।
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