अभी इस सवाल का समय नहीं...
पीटीआई को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा, 'पहलगाम में जो हुआ, उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच कोई दोस्ताना माहौल नहीं है। ऐसे में यह पूछना कि क्या पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में काम करने देना चाहिए, गलत है। यह सवाल बेहतर समय में उठाया जा सकता है, जब दोनों देशों के रिश्ते सुधरें, लेकिन अभी यह मुमकिन नहीं है।' जावेद ने जोर देकर कहा कि भारत ने हमेशा पाकिस्तानी कलाकारों का स्वागत किया, लेकिन पाकिस्तान की ओर से ऐसा रवैया कभी नहीं दिखा।
पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में मिला था सम्मान
जावेद अख्तर ने याद किया कि भारत ने नुसरत फतेह अली खान, मेहदी हसन, गुलाम अली और नूरजहां जैसे पाकिस्तानी कलाकारों को हमेशा प्यार और सम्मान दिया। उन्होंने मशहूर शायर फैज अहमद फैज का जिक्र करते हुए कहा, 'फैज साहब सिर्फ पाकिस्तान के नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप के शायर थे। जब वह अटल बिहारी वाजपेयी के समय भारत आए तो उनका स्वागत किसी राष्ट्राध्यक्ष की तरह किया गया, लेकिन पाकिस्तान ने कभी इस तरह का सम्मान भारतीय कलाकारों को नहीं दिया।'
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लता मंगेशकर का उदाहरण
जावेद अख्तर ने स्वर कोकिला लता मंगेशकर का उदाहरण देते हुए कहा कि 60 और 70 के दशक में वह पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय थीं, लेकिन उन्हें वहां कभी परफॉर्म करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के लोग लता जी को बहुत प्यार करते थे, लेकिन वहां की व्यवस्था ने हमेशा रुकावट डाली। यह एकतरफा रिश्ता कब तक चलेगा? हम प्यार और सम्मान देते हैं, लेकिन जवाब में कुछ नहीं मिलता।'
'अबीर गुलाल' पर विवाद
पहलगाम हमले के बाद फवाद खान की फिल्म 'अबीर गुलाल' पर भारत में रिलीज रोकने की खबरें सामने आई हैं। इस बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा कि अभी इस मुद्दे पर बात करना सही नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए बेहतर माहौल की जरूरत है।