ऑटिज़म बीमारी से पीड़ित बच्चे पर दीपक पर्वतयार द्वारा बनायी गयी एक डाक्यूमेंट्री फिल्म इटली में हुए एक फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत हुई है। लगभग 6 मिनट की यह फिल्म ऐसी बीमारी से ग्रस्त बच्चे की जिंदगी की कहानी कहती है।
आपको 'बर्फी' फिल्म में प्रियंका चोपड़ा का किरदार तो याद होगा। झिलमिल नाम की वह लड़की कुछ-कुछ इसी ऑटिज़म बीमारी की समस्या से पीड़ित थी।
उस लड़की का एक अलग ही संसार था। इस बीमारी की खासियत यही होती है कि इससे ग्रस्त बच्चे खुद की बनायी हुई कल्पना की एक दुनिया में ही जीते हैं।
डाक्यूमेट्री फिल्म मेकर दीपक पर्वतयार ने इसी विषय को फोकस करते हुए एक फिल्म बनायी है। सवा 6 मिनट की अवधि वाली इस फिल्म को इटली में चल रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया।
अंतिम दौर में जो 12 फिल्में शार्टलिस्ट हुईं उसमें दीपक पर्वतयार की यह डाक्यूमेंट्री फिल्म भी शामिल थी। यू ट्यूब पर इस फिल्म के वीडियो को देखकर इस फिल्म फेस्टिलव के आयोजकों ने खुद ही दीपक से इस फिल्म को यहां दिखाने का अनुरोध किया था।
इस फिल्म के बनने की घटना की चर्चा अमर उजाला से करते हुए दीपक कहते हैं कि इस कहानी की परिकल्पा मेरे दिमाग में तब आयी जब मैं अहमदाबाद में था। मेरे सामने एक बच्चा था जो अपने में ही खोया रहता था। वह दरअसल इसी बीमारी से ग्रस्त था।
लोग उसे मंदबुद्घि समझते लेकिन उसकी हरकतें एक तेज दिमाग वाले बच्चे जैसे होतीं। तभी मेरे मन में इस समस्या पर फिल्म बनाने का ख्याल आया। फिल्म बनाने और इसे यूट्यबू पर अपलोड करने के बाद इटली से इस फिल्म को दिखाने का बुलावा मेरे पास आया।
इस फिल्म में ऑटिज़म समस्या से पीड़ित बच्चों की स्वाभाविक हरकतों और उनकी कमियों को दिखाने के साथ यह भी बताया गया है कि वह बच्चे मंदबुद्घि या पागल नहीं होते।
देखें पूरी फिल्म