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IFFI 2022: लगातार फिल्मों के फ्लॉप होने पर आर बाल्की का बयान, शाहरुख खान को बताया सबसे बुद्धिमान

Fri, 25 Nov 2022 11:10 AM IST
मेघा चौधरी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में निर्देशक आर बाल्की ने एक मास्टर क्लास ली और फिल्मों के सफल और असफल होने पर बात की। वहीं, उन्होंने माउथ पब्लिसिटी को लेकर भी अपने विचार साझा किए।
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आर बाल्की - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस साल आई बॉलीवुड की कई फिल्मों को सोशल मीडिया पर बायकॉट ट्रेंड का शिकार होना पड़ा और बॉक्स ऑफिस पर इसका असर भी देखने को मिला। वहीं, अब फिल्मों की सफलता पर 'चुप रिवेंज ऑफ द आर्टिस्ट', ‘चीनी कम’, ‘की एंड का’ और ‘पैड मैन’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले आर बाल्की ने 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में 'नेगोशिएटिंग एस्थेटिक्स एंड इकोनॉमिक्स' विषय पर एक मास्टर क्लास ली। इस दौरान आर बाल्की ने फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर सफल और असफल होने को लेकर बात की।

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53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) गोवा में निर्देशक आर बाल्की ने कहा कि बहुत सारी फिल्में जो बॉक्स ऑफिस पर असफल होती हैं या अच्छा नहीं करती हैं, इसका कारण यह है कि लोग उन फिल्मों के बारे में नहीं जानते हैं। रचनात्मक दुनिया में हम एक बुलबुले में रहते हैं। बहुत सारे लोगों को नहीं पता था कि चुप जैसी फिल्म होती भी है, और मुझे लगा कि इसमें मुफ्त शो हैं और यह बहुत अच्छा है। मेरे बहुत सारे दोस्त जिनसे मैं वर्षों बाद मिला, उन्होंने मुझसे पूछा, 'तो, तुम आगे क्या कर रहे हो?', और मैंने कहा कि मैंने अभी चुप बनाई है, इसपर उन्होंने पूछा, 'यह क्या है?' मैं चौंक गया कि यह लोगों तक नहीं पहुंची। तुम चाहो या न चाहो अलग बात है, लेकिन अगर तुम्हें पता भी नहीं चलता तो दिक्कत है।

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इसके आगे उन्होंने कहा कि वह माउथ पब्लिसिटी से नफरत करते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे आश्चर्य है कि यह कैसे होता है? लोग फिल्म देखते हैं और जाते हैं और सबसे कहते हैं कि इसे देखें? नहीं, इसे इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए जब चारों ओर पहले से ही उत्साह हो और फिल्म देखने के लिए उन्हें बस थोड़ा सा कहने की जरूरत हो। मुझे लगता है कि साइंस की कमी के कारण बहुत सारी क्रिएटिविटी प्रभावित होती है। मुझे लगता है कि माउथ पब्लिसिटी के पीछे एक सही प्रक्रिया होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा, 'अगर आप 100 फिल्में बना रहे हैं और उनमें से 90 पैसा नहीं कमा रही हैं, तो निश्चित रूप से इंडस्ट्री में कुछ गड़बड़ है। इस इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, राइटर, ट्रेड और मीडिया सब ज्ञानी हैं, जो औंधे मुंह गिर जाते हैं। वे गिरते हैं और बिना कुछ सीखे आगे बढ़ते हैं। सिनेमा में शानदार मार्केटिंग करने वाले लोग हैं, लेकिन किसी तरह जब वे इस जोन में आते हैं तो उनके डेटा की पूरी रीडिंग आउटडेटेड लगने लगती है। बाल्की ने आगे कहा कि फिल्में कैसे चलती हैं, इसका कोई फार्मूला नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन क्या करता है। आप यह नहीं कह सकते कि दर्शक इसे चाहते हैं। नहीं, दर्शक अच्छा काम चाहते हैं। एक अच्छी फिल्म, गाने या सितारों को अपनी बेहतरीन पंक्तियां बोलते हुए कौन नहीं देखना चाहता?

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बाल्की ने कहा कि स्टार्स एक बुनियादी गलती कर रहे हैं कि वे प्रोड्यूसर्स की पैसा बनाने वाली मशीन में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वे सोचते हैं कि अगर मुझे यह राशि वसूलनी है तो मुझे इस तरह का काम करना होगा और तभी मैं पैसे की वसूली कर पाऊंगा। मेरा मानना है कि अगर बड़े सितारों ने उनमें निवेश किया होता तो बहुत सारे छोटे विचार बड़े हो सकते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कमल हासन एक ऐसे स्टार थे जिन्होंने 80 के दशक में सदमा जैसी फिल्मों के साथ प्रयोग किया था। शाहरुख खान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, शाहरुख ने डियर जिंदगी की है। उन्होंने स्वदेस और पहेली के साथ भी प्रयोग किया और अगर वे फिल्में चल जातीं तो भारतीय सिनेमा एक अलग मोड़ ले लेता। वह भारतीय सिनेमा के सबसे बुद्धिमान लोगों में से एक हैं।

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