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Amar ujala Samwad: 'अमर उजाला करोड़ों घरों का सदस्य है'; बोले वरुण शर्मा, पुलकित ने कहा- '77 बार सैल्यूट'

Wed, 17 Dec 2025 06:48 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Haryana Amar ujala Samwad: आज बुधवार 17 दिसंबर 2025 को हरियाणा के गुरुग्राम में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यहां 'राहु केतू' फिल्म के सितारे वरुण शर्मा, पुलकित सम्राट और शालिनी पांडे पहुंचे। तीनों सितारों ने अमर उजाला के साथ अपने रिश्ते पर दिलचस्प बातें साझा कीं।
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संवाद में वरुण शर्मा, पुलकित सम्राट, शालिनी पांडे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के मंच पर आज कई दिग्गज हस्तियां पहुंचीं। हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित इस चर्चा में आगामी फिल्म 'राहु केतू' के सितारे वरुण शर्मा, शालिनी पांडे और पुलकित सम्राट ने भी शिरकत की। उन्होंने इस फिल्म के साथ-साथ अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर भी कई रोचक प्रसंग साझा किए। साथ ही अमर उजाला अखबार के साथ रिश्ते पर भी बात की।

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तीनों लोकप्रिय स्टार्स से पूछा गया कि आप संवाद में शामिल हुए। अमर उजाला के बारे में क्या कहना चाहेंगे? इस पर तीनों ने इस तरह जवाब दिए:

'अमर उजाला को 77 बार सैल्यूट': पुलकित सम्राट
पुलकित सम्राट:
मैं तो अमर उजाला को 77 बार सैल्यूट करना चाहूंगा। अमर उजाला को 77 वर्ष हो गए हैं। इतने बड़े-बड़े लोगों ने यहां आकर हमसे सवाल किए। पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। आप अमर रहें और उज्जवल रहें'।

'मेरे माता-पिता मुझे यहां देखकर बहुत खुश होंगे': शालिनी पांडे
शालिनी पांडे:
'77वें वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। बहुत गर्व की बात है। मेरे माता-पिता बहुत खुश होंगे, आज मुझे यहां देखकर। वे जबलपुर से हैं। छोटी जगहों पर यह चीजें बहुत मायने रखती हैं। वे बहुत खुश होंगे कि मैं यहां हूं'।
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'यह अखबार नहीं है, यह बहुत करोड़ों घरो का सदस्य है': वरण शर्मा
वरुण शर्मा:
'मेरा मोबाइल साथ नहीं है, नहीं तो अभी दिखाता आपको, मेरे मामा गाजियाबाद में रहते हैं और वो मम्मी को तीन दिन से फोटो भेज रहे हैं कि मैं अमर उजाला में आ रहा हूं। उन्हें इस बात का ज्यादा स्ट्रेस हो रहा था कि यहां आकर ये सीरियस बातें करेगा कैसे'। वरुण ने आगे कहा, 'अमर उजाला का बहुत गहरा रिश्ता है। 77 साल बहुत लंबा समय है। 177 साल का जश्न भी मनाएं आप सभी। यह अखबार नहीं है, यह बहुत करोड़ों घरो का सदस्य है। दादा ने पढ़ा है, मम्मी-पापा ने पढ़ा, बच्चों ने पढ़ा है। जिस तरह आप अपनी पुश्तैनी चीजें घरों को देते हैं, वैसे ही अमर उजाला के अखबार की प्रथा है, यह भी पीढ़ीगत है, जो अगली पीढ़ी को मिलती है। पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई। हमें उम्मीद है कि हमें दोबारा यहां आने का मौका मिल सके'।

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