हाल ही में खबर आई थी कि नेशनल फिल्म आर्काइव NFAI से 9000 फिल्मों के प्रिंट गायब हो गए हैं। इस मामले में शबाना आजमी ने इंफॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर स्मृति ईरानी को एक ट्वीट किया है।
शबाना आजमी ने लिखा, 'स्मृति ईरानी, पुणे के नेशनल फिल्म आर्काइव से 9200 फिल्मों के प्रिंट खो गए हैं। इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।'
इंडियन एक्सप्रेस पर छपी खबर के अनुसार, RTI का जवाब देने के दौरान पता चला कि ये फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं।
गायब फिल्मों में मशहूर भारतीय फिल्मकारों और विदेशी फिल्मकारों की क्लासिक फिल्में भी शामिल हैं। दरअसल 2010 में नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया ने पुणे की एक फर्म को अपनी सभी रील्स पर बारकोड लगाने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन कंपनी को इस दौरान पता लगा कि कई फिल्में कागजी रिकॉर्ड में तो हैं लेकिन उनकी रील्स फिजिकली मौजूद नहीं हैं।
गायब होने वाले प्रिंट्स में सत्यजीत रे की 'पाथेर पंचाली' , मेहबूब खान की 'मदर इंडिया', राज कपूर की 'मेरा नाम जोक'र और 'अवारा' और गुरु दत्त की 'कागज के फूल' समेत कई निर्देशकों की फिल्मों के प्रिंट गायब हैं। कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रिंट्स भी मिसिंग हैं।
नमें 'बैटलशिप पोटेमकिन', 'बाइसाइकिल थीफट, जापानी फिल्मकार अकीरा कुरोसोवा की 'सेवन समुराय' 'नाइफ इन द वाटर' जैसी फिल्मों के अलावा 100 से ज्यादा साइलेंट फिल्में भी गायब हैं। यही नहीं, नेशनल फिल्म आर्काइव्स ऑफ इंडिया के पास से 401 डीवीडी भी गायब हैं।