पिता के साथ चलाते थे जूस की दुकान
गुलशन कुमार की रुचि बचपन से ही व्यवसाय में थी। उनके पिता की जूस की दुकान थी, जिसमें वे उनका हाथ बंटाया करते थे। यहीं से उनके संघर्ष की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे वे म्यूजिक इंडस्ट्री की ओर बढ़ते चले गए। इस जूस की दुकान के बाद उनके पिता ने एक दूसरी दुकान ली, जिसमें सस्ती कैसेट में गाने रिकॉर्ड करके बेचे जाते थे। यहीं से गुलशन की किस्मत का सितारा चमक उठा।
ऐसे बने कैसेट किंग
उन्होंने आगे चलकर सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी खोली जो खूब मशहूर हुई। देखते ही देखते यह भारत की सबसे मशहूर कंपनी बन गई और गुलशन कुमार को कैसेट किंग कहा जाने लगा। इसी के तहत उन्होंने टी-सीरीज की शुरुआत की, जिसने कई सिंगरों को गाने का मौका दिया। महज 10 वर्षों में उनके नेतृत्व में कंपनी का बिजनेस 350 मिलियन यानी साढ़े तीन करोड़ तक पहुंच गया।
कई गायकों को दिया मौका
अनुराधा पौडवाल, सोनू निगम और कुमार सानू के करियर में गुलशन का खास योगदान रहा है। अपनी कंपनी के तहत उन्होंने इस सभी को गाने का मौका दिया। 80 से 90 के दशक के बीच गुलशन ने अपने मेहनत से खूब शोहरत हासिल की, लेकिन यह बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आई। 12 अगस्त, 1997 को मुंबई के अंधेरी पश्चिम उपनगर जीत नगर में जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर उनकी हत्या कर दी गई। उस समय उनकी उम्र महज 46 साल थी। गोली इस हत्या के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री में सनसनी फैल गई थी। कहा जाता है कि अंडरवर्ल्ड ने उनसे फिरौती मांगी थी, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया था।
Hrithik Roshan: राम गोपाल वर्मा को था ऋतिक की काबिलियत पर शक? बोले- मुझे नहीं लगा था वह स्टार बन पाएंगे