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`जॉम्बी’ फिल्मों में सैफ जैसा माचो मैन जरूरी हैः राज

Sun, 07 Apr 2013 11:45 AM IST
प्रतिमा पांडेय
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हर दूसरी फिल्म में हीरो के एक घूंसे से छह-छह भारी-भरकम गुंडों को हवा में उछालती फिल्मों का दौर शुरू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ हैं।
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रोमांटिक फिल्मों की भीड़ में एक्शन का तड़का भी दर्शकों को खूब पसंद आया और हिट हो गया।

इसी बीच कॉमेडी ने भी बड़े परदे पर दस्तक दी और एक के बाद एक कॉमेडी के बढ़िया प्रोजेक्ट्स सामने आए। अब इनके बीच शुरू हो रहा है जॉम्बीज का दौर।

अब बड़े परदे पर भूत-प्रेत नहीं, जिंदा लाशें दर्शकों को डराएंगी। ऐसी ही एक फिल्म `राइज ऑफ जॉम्बीज’ हाल ही में रिलीज हो चुकी है और दूसरी फिल्म `गो, गोआ गॉन’ मई में रिलीज होने वाली है। इसमें सैफ मुख्य भूमिका में हैं।



फिल्म `गो गोआ गॉन’ और `राइज ऑफ जॉम्बीज’ बड़े परदे पर हॉरर के एक नए दौर की शुरुआत हैं। सबसे बड़ी बात यह कि इन फिल्मों के पीछे बड़े नाम हैं। बतौर एक्टर भी और बतौर निर्माता-निर्देशक भी।
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फिल्म `गो, गोआ गॉन’ में तो सैफ अली खान जैसा बडा स्टार है। सैफ अली खान जैसे स्टार का जॉम्बी आधारित फिल्म से जुड़ना एक तरह से इस दौर के लंबा चलने का सबूत है।

इसमें नयापन है, इसलिए आत्मा, भूत और पुनर्जन्म जैसी चीजों के बाद शायद दर्शकों को हॉरर के नाम पर यह कुछ नया लगे।

फिल्म 'गो गोआ गॉन' में डायरेक्टर जोड़ी है राज निदिमोरू और कृष्णा डीके की। डीके कहते हैं, `हमारी फिल्म के ट्रेलर की रिलीज के दो दिन के अंदर इसे 20 लाख हिट मिले।'

वे कहते हैं, 'इससे दर्शकों का रुझान समझ में आता है। लोग इस तरह की फिल्म को समझने और देखने के लिए उत्सुक हैं। जॉम्बी फिल्म में एक्शन का खूब स्कोप होता है। इस कारण भी लोगों को पसंद आती है।'

डीके ने कहा, '`गो गोआ गॉन’ में हमने एक्शन और हॉरर के साथ कॉमेडी को भी सामने रखा है। सैफ को जब हमने कहानी सुनाई, तो इसमें एक्शन के साथ कॉमेडी का मिक्स जानने के बाद सैफ ने न सिर्फ हां कहा, बल्कि उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी फिल्में जरूर बननी चाहिए।'

आखिर क्या है जॉम्बी
राज निदिमोरू के शब्दों में,`यह इनसान की जिंदा लाश जैसी स्थिति होती है। जिसमें ब्रेन के बाकी फंक्शंस काम नहीं कर रहे होते, लेकिन विंध्वंस मचाने की बात ही दिमाग में होती है।'

तेजी है जरूरी
कृष्णा डीके कहते हैं, `हमने कोशिश करके फिल्म का पेस तेज रखा है। `गो गोआ गॉन’ एक घंटा पैंतालीस मिनट की है। इस जॉनर की फिल्में फास्ट, शॉर्ट ऐंड स्वीट होने का ही मजा है।'

टेक्नीक का कमाल
डीके का कहना है, `एक्शन, हॉरर या फिर जॉम्बी टाइप की फिल्मों में नब्बे फीसदी मेकअप वगैरह होता है, तो दस फीसदी स्पेशल इफेक्ट्स होते हैं।'

वे आगे कहते हैं, 'हमने अपनी फिल्म में एक्शन का स्टैंडर्ड आगे ले जाने की कोशिश की है। फिल्म को लेकर जो उत्सुकता का माहौल बना है, उसे देखते हुए हम दर्शकों को निराश नहीं कर सकते।'

जरूरी है माचोमैन
'जॉम्बी फिल्म हो, तो हीरो की माचो लुक मैटर करती हैं।' कहते हैं राज। उनके अनुसार उन्होंने सैफ को चुना, क्योंकि फिल्म में रशियन माफिया और एक्शन हीरो के तौर पर सैफ की माचो लुक परफेक्ट है। उस पर उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी स्ट्रॉन्ग है।’
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गौरतलब है कि, कॉलेज टाइम से दोस्त बनी ये डायरेक्टर जोड़ी `शोर इन द सिटी’ और `99’ नामक फिल्मों से पहले ही समीक्षकों की तारीफ बटोर चुकी है। अब जॉम्बी फिल्म के साथ हाजिर है।
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