गिरीश कर्नाड ने 1970 में कन्नड़ फिल्म 'संस्कार' से अपना फिल्मी सफर शुरू किया। उन्हें दूरदर्शन पर प्रसारित किए जाने वाले मशहूर शो मालगुड़ी डेज में स्वामी के पिता की भूमिका के लिए भी याद किया जाता है। उनकी मशहूर कन्नड़ फिल्में तब्बालियू मगाने, ओंदानोंदु कलादाली, चेलुवी, कादु और कन्नुड़ु हेगादिती रही हैं।
हिंदी में उन्होंने 'निशांत', 'मंथन' और 'पुकार' जैसी फिल्में कीं। इसके अलावा सलमान खान के साथ वो 'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' में भी दिखाई दिए थे, यही उनकी आखिरी हिंदी फिल्म भी थी। उनकी आखिरी फिल्म कन्नड़ भाषा में बनी 'अपना देश' थी।
मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान
1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार, 1974 में पद्मश्री, 1992 में पद्मभूषण पाने वाले गिरीश कर्नाड को अमर उजाला की ओर से आकाशदीप सम्मान दिया जा चुका है। भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा लेखन-जीवन के समग्र अवदान के लिए सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप' दिया जाता है। यह सम्मान उन्हें साल 2018 में दिया गया था।