कोर्ट ने मेकर्स को लगाई थी फटकार
- यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 12 फरवरी को फिल्म निर्माताओं पर 'घुसखोर पंडित' शीर्षक को लेकर कड़ी फटकार लगाने के बाद आया है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल समाज के किसी वर्ग को बदनाम करने के लाइसेंस के रूप में नहीं किया जा सकता।
- न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने केंद्र सरकार, सीबीएफसी और फिल्म निर्माता को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि शीर्षक बदले बिना फिल्म को रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
याचिका में कही गई ये बात
ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा द्वारा अधिवक्ता डॉ. विनोद कुमार तिवारी के माध्यम से फिल्म को लेकर याचिका दायर की गई थी। इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का शीर्षक और कहानी जाति और धर्म आधारित रूढ़िवादिता को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।