कुछ समय पहले चीनी सेना के भारतीय सीमा में बढ़ रहे दखल को मद्देनजर रखते हुए कुछ देशभक्तों ने भारत के बाजारों में जड़ें जमाए चीनी सामान को न खरीदने की मुहिम चलाई थी। अब यह अभियान कितना कारगार साबित हुआ, यह तो जगजाहिर है। लेकिन अब भारतीय सिनेमा में बाहरी कंपनियों के बढ़ते दखल की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है, जिसमें अमेजन ने भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित पुरस्कार फिल्मफेयर को स्पॉन्सर करने का बीड़ा उठाया है।
बेशक, भारत दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी के चलते दुनिया के सभी देशों का व्यापार के नजरिए से हमेशा केंद्र रहा है। शुरुआत से ही बाहरी शक्तियों ने भारत को एक कमाऊ बाजार के नजरिए से देखा है, और दुनिया की किसी भी कंपनी को नंबर वन बनाने और नीचे गिराने में भारत का बहुत बड़ा हाथ होता है। देशवासियों की दूसरी जरूरतों के अलावा मनोरंजन के साधनों में से एक सिनेमा में पिछले कुछ ही सालों में एक क्रांति आई है, जिसमें बाहरी कंपनियों नेटफ्लिक्स और अमेजन ने भरपूर रुचि दिखाई है।
हाल ही में अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस ने भारत में अपनी जड़ें और मजबूती से जकड़ने की नीयत से भारत दौरा किया, और हिंदी सिनेमा के शीर्ष कलाकारों और फिल्मों से जुड़े लोगों से मुलाकात की। उनका मन तो भारत के हर क्षेत्र में पैर पसारने का था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मुलाकात न करके जेफ के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जेफ के इस भारत दौरे का असर अब दिख रहा है, जब भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित सम्मान फिल्मफेयर के स्पोंसर में अमेजन ने पान पराग, जिओ डिजिटल और विमल पान मसाला को नीचे छोड़कर अपना स्थान टॉप पर हासिल कर लिया।
यह पहला मौका है जब किसी बाहरी कंपनी ने सिनेमा के अवार्ड फिल्मफेयर में रुचि दिखाई है। भारतीय सिनेमा के लिए यह हो सकता है कि दुनियाभर के सिनेमा में आदान-प्रदान और कलाकारों को पारदर्शिता का अनुभव कराए, लेकिन भारतीय कंपनियों के लिए यह खतरे की घंटी हो सकती है।