-निर्माताः अरुण पांडे
-निर्देशकः नीरज पांडे
-सितारेः सुशांत सिंह राजपूत, कियारा आडवाणी, दिशा पाटनी, अनुपम खेर, भूमिका चावला
रेटिंग***
जिंदगी में जब बाउंसर पड़ें तो क्या करना चाहिए? क्रिकेट की किताब कहती है मैदान में ऐसी गेंद को हुक किया जा सकता है। नीचे झुक कर जाने दिया जा सकता है। दोनों स्थितियों में यह ध्यान रखते हुए कि चोट न खा जाएं, अपना विकेट भी बचाए रखना पड़ता है।
भारतीय क्रिकेट पर अमिट छाप छोड़ चुके महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी की कहानी बताती है कि वह कठिन हालात में भी डटे रहे। कुछ बाउंसरों को हुक किया और कुछ डक किए। उन्होंने क्रिकेट की किताब को एक हेलीकॉप्टर शॉट भी दिया, जिसे लोकल खिलाड़ी थप्पड़ शॉट कहते हैं। कुछ लोग पलट कर हालात को थप्पड़ मारने का जज्बा और माद्दा रखते हैं।
धोनी में यह जिगर दिखता है। वह कर गुजरते हैं। इसलिए प्रेरक लोगों में वह शुमार हैं। मगर जहां तक उनकी बायोपिक का सवाल है, वह जिंदगी से ज्यादा दस्तावेज सरीखी है। अक्सर इन फिल्मों को इस मुश्किल का सामना करना पड़ता है। कोई-कोई ही जिंदगी को जिंदगी जैसा पर्दे पर उतार पाने में कामयाब होता है। इस मामले में नीरज पांडे उत्साहित नहीं करते।