दुनिया में महिलाओं द्वारा उनके यौन शोषण पर चलाए गए मीटू आंदोलन में फंसे योग गुरु बिक्रम चौधरी की कहानी पर बनी फिल्म कनाडा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में प्रदर्शित की गई। टोरंटो में 44वें विश्व फिल्म समारोह में स्क्रीन की गई इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म का नाम ‘बिक्रम : योगी, गुरु, प्रिडेटर’ है। फिल्म का निर्देशन इवा ओर्नर ने किया है।
इस वृत्तचित्र में 1970 में बिक्रम चौधरी के लोकप्रिय होने से लेकर उन पर लगे दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोपों की कहानी है। ओर्नर ने फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद कहा कि इस फिल्म को बनाने के पीछे का मकसद ‘दुनिया को महिलाओं की कहानी बताना और इसे दुनिया की नजरों में लाना है। उन्होंने एक ऐसे माहौल में अपनी आवाज उठाई जहां सहयोग का माहौल नहीं था।’
मीटू के तहत बिक्रम चौधरी पर लगे यौन उत्पीड़न व दुष्कर्म के आरोपों के बाद वह एक विवादित छवि के इंसान बन गए। पांच महिलाओं ने बिक्रम चौधरी के खिलाफ आरोप लगाए हैं। उनमें से कई इस फिल्म में हैं। कैलिफोर्निया की एक अदालत ने आरोप बरकरार रखे हैं, लेकिन चौधरी अब भी आजाद है। फिल्म के अंत में दिखाया गया है कि चौधरी कानून की शिकंजे से दूर मेक्सिको और स्पेन में योग शिविर लगाए है।
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