भारत की पहली फूडी फिल्म कही जाने वाली फिल्म 'लव शव ते चिकन खुराना' की टीम अमर उजाला के नोएडा ऑफिस आई। फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप के साथ फिल्म के हीरो कुणाल कपूर और नायिका हुमा कुरैशी उनके साथ थीं।
फिल्म की पूरी टीम अपनी इस नई फिल्म से उत्साहित नजर आई। सभी का कहना था कि भारत में जहां लोग खाने-पीने के इतने शौकीन हैं बहुत सारी फूडी फिल्में बननी चाहिए। प्रश्नों का जवाब देते हुए हर किसी ने फिल्म से जुड़ने की अलग-अलग वजहें बताईं।
अनुराग बोलेः
फिल्म के निर्माता अनुराग कश्यप ने कहा कि जब मेरे पास इस फिल्म की स्किप्ट आई तो उसे पढ़कर मुझे लगा कि इस विषय पर दिल को छू लेने वाली दिलचस्प फिल्म बनाई जा सकती है। पटकथा और स्टारकॉस्ट तय करने के बाद फिर यह पूरी तरह से फिल्म के निर्देशक समीर शर्मा की फिल्म थी। मैने शूटिंग के दौरान उसमें कोई दखल नहीं दी। एक निर्माता के रूप में उन्हें जहां पर भी मेरा रचनात्मक सहयोग चाहिए था वह मैने किया।
कुणाल ने कहाः
कुणाल ने कहा कि मेरे लिए यह अब तक की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्म का विषय मेरे बहुत करीब है। पंजाबी लड़के का किरदार निभाते हुए मुझे खुशी मिली है। मुझे पंजाबी संस्कृति पर बेस्ड फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं। यह फिल्म प्रयोग के नए दरवाजे खोल सकती है। मेरा पास जो भी स्क्रिप्ट आती हैं उनमें मैं यह बात जरूर देखता हूं कि इस रोल के लिए मैं फिट बैठ रहा हूं या नहीं।
चहकी हुमाः
हुमा ने कहा कि मेरे लिए इस फिल्म में काम करने का बहुत अच्छा एक्सपीरियंस रहा। मैं खाने-पीने की शौकीन हूं और इस फिल्म में मेरे लिए खाने का खूब स्कोप था। गैंग्स ऑफ वासेपुर से उलट यह बिल्कुल अलग कैटेगरी की फिल्म है। विषय के आधार पर पूरी तरह से अलग होने के बावजूद इनकी मेकिंग स्टाईल में मुझे समानता दिखती है। हुमा ने कहा कि यह खुशी की बात है कि अभी तक मैने जो भी फिल्में की हैं उनका मिजाज मेरे स्वभाव के अनुकूल ही रहा है।