फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatima Sana Shaikh अपनी बीमारी पर खुलकर बोलीं फातिमा सना शेख, 'विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसा कुछ हो सकता है'

Sun, 03 Nov 2024 09:50 PM IST
तनु चतुर्वेदी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने अपनी बीमारी पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, जब उन्हें पता चला कि ऐसा कुछ है, तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ था कि उन्हें ऐसी बीमारी कैसे हो सकती है।
विज्ञापन
फातिमा सना शेख - फोटो : इंस्टाग्राम
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने आमिर खान की फिल्म दंगल में शानदार अभिनय से सुर्खियां बटोरी है। फातिमा ने अब अपनी एपिलेप्सी या मिर्गी की बीमारी के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ था कि उन्हें कोई मानसिक बीमारी है।
विज्ञापन

फातिमा सना शेख - फोटो : इंस्टाग्राम @fatimasanashaikh
डर था कि सबके सामने न पड़े दौरा
फिल्मफेयर के साथ इंटरव्यू के दौरान फातिमा सना शेख ने कहा, "दंगल की शूटिंग के दौरान मुझे मिर्गी (एपिलेप्सी) की बीमारी होने का पता चला। पहले तो मैं इनकार कर रही थी और यह स्वीकार करने को तैयार नहीं थी कि मुझे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, इसलिए मैंने कोई दवा नहीं ली। मुझे डर था कि लोगों के सामने मुझे मिर्गी (एपिलेप्सी) का दौरा पड़ सकता है। मिर्गी के साथ बहुत सारे कलंक जुड़े हुए हैं। लोगों को लगता है कि आप या तो ड्रग्स ले रहे हैं, ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं या भूत-प्रेत से ग्रसित हैं और इससे बचना चाहिए।"

फातिमा सना शेख - फोटो : इंस्टाग्राम @fatimasanashaikh
दवाइयां नहीं ले रही थीं फातिमा
फातिमा ने बातचीत के दौरान कहा कि वे अपनी दवाइयां समय से नहीं ले रही थीं। उन्होंने कहा कि इसलिए मुझे और अधिक दौरे पड़ते थे। मैं दवाइयां नहीं लेना चाहती थी, मैं न केवल लोगों से लड़ रही थी बल्कि दवाइयों से भी लड़ रही थी। मुझे लगा कि सामान्य जीवन जीने के लिए मुझे उनकी जरूरत नहीं है।
विज्ञापन

फातिमा सना शेख - फोटो : इंस्टाग्राम @fatimasanashaikh
फ्लैशलाइट से होती है परेशानी
मुझे एक हफ्ते में एक या दो बार दौरे पड़ते थे और कार्यक्रम से पहले की चिंता बहुत ज्यादा होती थी। मैं इतना डर गई थी कि मैंने इवेंट और स्क्रीनिंग में जाना बंद कर दिया। आखिरकार, मैंने पैपराजी को अपनी स्थिति के बारे में बताया और वे अविश्वसनीय रूप से विचारशील थे। उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि जब मैं आस-पास होती तो फ्लैशलाइट का इस्तेमाल न करें। कभी-कभी, मेरे सहकर्मी समझ नहीं पाते थे, लेकिन पैपराजी समझ जाते थे।"
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें