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अपनी ही फिल्म नहीं देख पाए फारुख शेख

Tue, 31 Dec 2013 12:44 PM IST
अमर उजाला, हाथ्ारस
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बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता फारुख शेख ने 32 साल पहले जिस फिल्म में बतौर मुख्य अभिनेता काम किया था, वह उस फिल्म को पर्दे पर नहीं देख पाए। इसकी मुख्य वजह यह रही कि यह फिल्म पूरी बनने के बाद भी रिलीज नहीं हो सकी है। वैसे अब इसे रिलीज कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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शहर के समाजसेवी मुन्नालाल रावत ने 6 जून 1982 में शारदा चित्रम के बैनर तले एक फिल्म उद्धार की शुरुआत की थी।  इस फिल्म की पूरी शूटिंग मुंबई में हुई। इसमें संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था। इस फिल्म में पांच गीत फिल्माए गए, जोकि प्रसिद्ध गीतकार गोपालदास नीरज के अलावा शहर के बागला डिग्री कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर और मशहूर साहित्यकार डॉ.मोहन प्रदीप ने लिखे थे।

फिल्म की कहानी भी डॉ.मोहन प्रदीप ने लिखी थी। पटकथा और संवाद एसवी शर्मा ने लिखे और निर्देशक राजा नावथे थे। इस फिल्म के बारे में रावत बताते हैं कि उन्होंने शुरू में मुंबई जाकर इसके मुख्य अभिनेता के लिए नसरुद्दीन शाह से संपर्क किया और उसके बाद अनिल क पूर से संपर्क किया, लेकिन  दोनों ने बजट से ज्यादा पैसा मांगा तो फि र फारुख शेख ने इस फिल्म में बतौर मुख्य अभिनेता के रूप में साइन किया।
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फिल्म में मुख्य अभिनेत्री सुप्रिया पाठक थीं तो इसके अलावा मजहर खान और शिवा आदि कलाकार भी थे। इसमें नीरज का यह मशहूर गीत ‘अबके बरसात में शरारत ये मेरे साथ हुई, छोड़कर मेरा घर सारे शहर में बरसात हुई’ के अलावा डॉ.मोहन प्रदीप का गीत ‘सौदा होता नहीं प्यार में, इसे बेचो न बाजार में’था।

दोनों गीतों की फारुख ने भी बेहद तारीफ की थी। इस फिल्म में टाइटल सांग ‘जब-जब पाप अधर्म का बढ़ा धरा पर भार, परशुराम अवतार लें, करते हैं उद्धार’ था। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की के ऊपर थी, जो रेप पीड़ित थी और समाज में उसे कोई अपनाने को तैयार नहीं था।

एक तरह से फिल्म सामाजिक बुराई पर प्रहार थी। फिल्म काफी दिनों बाद 1994 में पूरी हुई, लेकिन रावत के मुताबिक स्वास्थ्य खराब होने पर वह मुंबई से लौट आए और फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। हालांकि फिल्म सेंसर बोर्ड से पास हो चुकी है। अभी भी यह प्रयास चल रहे हैं कि फिल्म रिलीज हो जाए। फिल्म का ट्रेलर तैयार है। इस फिल्म निर्माण  में 30 लाख रुपये उनके खर्च हो चुके हैं और उनके अन्य सहयोगी अनिल अग्रवाल भी दो लाख रुपये खर्च कर चुके हैं।

फिल्मी दुनिया में कम होते हैं फारुख जैसे इंसान
फिल्म निर्माता मुन्नालाल रावत फारुख के इस दुनिया को छोड़कर चले जाने से काफी दुखी नजर आए। उनका कहना है कि फारुख शेख बेहद उदार इंसान थे। उनके अंदर बड़े एक्ट्रेस होने का बिल्कुल घमंड नहीं था। ऐसे इंसान फिल्मी दुनिया में कम ही होते हैं। रावत का कहना है कि हालांकि वह हाथरस तो नहीं आए थे और फिल्म की पूरी शूटिंग मुंबई में ही हुई थी, लेकिन समय-समय पर फारुख शेख उनका और अन्य परिजनों का हालचाल लेते रहते थे।

रावत के पुत्र अशोक रावत ने बताया कि पिछले दिनों वह आगरा आए थे और तब भी इस फिल्म के बारे में पूछ रहे थे। खुद फारुख चाहते थे कि फिल्म पर्दे पर आए। वह चूंकि आर्ट फिल्मों से जुड़े थे और यह उनकी कॉमश्ऱियल फिल्म थी।
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