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असम के मशहूर संगीतकार और बांसुरी वादक प्रभात शर्मा का निधन, मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने जताया शोक

Tue, 02 Mar 2021 05:20 PM IST
अमरीन हुसैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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प्रभात सर्मा - फोटो : फाइल
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असम के मशहूर संगीतकार और बांसुरी वादक प्रभात शर्मा का निधन हो गया है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 2 मार्च यानी आज मंगलवार को उन्होंने गुवाहाटी में अंतिम सांस ली। जाने-माने संगीतकार 85 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए।

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उनकी बेटी ताराली शर्मा ने बताया कि वे सुबह 4:30 बजे उठे थे। फिर उन्होंने अपनी पत्नी से बात भी की थी। इसके बाद वे दोबारा जाकर सो गए थे। सुबह अंटी 6 बजे उठाने आई थीं वो रोने लगीं। वो दुनिया से जा चुके थे। उन्होंने गुवाहाटी के अंबिकागिरी नगर स्थित घर में दम तोड़ा। बता दें कि बेटी ताराली खुद भी एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायिका हैं।
प्रभात शर्मा के जाने के बाद परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटियां और कुछ बच्चे रह गए हैं। उनके निधन से सभी तरफ शोक का माहौल है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रभात जी का जाना राज्य के सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

 


राजनीतिक दलों और कई संगठनों ने भी प्रमुख संगीतकार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। कई सम्मानों से नवाजे जा चुके संगीतकार को 2003 में असम के लोक और पारंपरिक संगीत में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया था। उनके पास संगीत वाद्ययंत्रों का एक संग्रह था, जिनमें से कुछ अब आसानी से उपलब्ध भी नहीं हैं।

उन्होंने एक छोटे एक संग्रहालय का निर्माण किया था। बाद में वह जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग करते रहते थे। वह एक टीवी निर्देशक के रूप में भी कई फिल्मों से जुड़े थे। इसके अलावा उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों और मंच नाटकों की भी रचना कर डाली।

असम में शास्त्रीय सत्तारिया नृत्य के शोध में भी वे लगे रहे थे। इसकी रचना श्रीमंत शंकरदेव ने की थी। उनके निधन के बाद गुरु जतिन गोस्वामी, लोक गायक लोकनाथ गोस्वामी और गीतकार प्रशांत बोरदोलोई सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शर्मा के घर का दौरा किया और पुष्पांजलि अर्पित की।

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शर्मा का अंतिम संस्कार शाम को नाभाग्रह श्मशान में किया जाना है। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र ले जाया गया। इसके आलावा अखिल भारतीय रेडियो कार्यालय, रवीन्द्र भवन, आसम साहित्य सभा और AASU के शहीद भवन में उन्हें ले जाया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए काफी लोग मौजूद थे।

 

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