असम के मशहूर संगीतकार और बांसुरी वादक प्रभात शर्मा का निधन हो गया है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 2 मार्च यानी आज मंगलवार को उन्होंने गुवाहाटी में अंतिम सांस ली। जाने-माने संगीतकार 85 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए।
যশস্বী সংগীতজ্ঞ, বাঁহীবাদক প্ৰভাত শৰ্মাদেৱৰ বিয়োগত মৰ্মাহত হৈছোঁ। অসমৰ সংগীতৰ চহকী যাত্ৰাত তেখেতে যি অনবদ্য অৱদান আগবঢ়াই গৈছে, সেয়া স্মৰণীয় হৈ ৰ'ব।
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এই শোকৰ মুহূৰ্তত শৰ্মাদেৱৰ পৰিয়ালবৰ্গ আৰু গুণমুগ্ধলৈ গভীৰ সমবেদনা জনালোঁ আৰু তেখেতৰ আত্মাৰ চিৰশান্তি কামনা কৰিলোঁ।
ঔঁ শান্তি pic.twitter.com/QlSPkCkUUa
राजनीतिक दलों और कई संगठनों ने भी प्रमुख संगीतकार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। कई सम्मानों से नवाजे जा चुके संगीतकार को 2003 में असम के लोक और पारंपरिक संगीत में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया था। उनके पास संगीत वाद्ययंत्रों का एक संग्रह था, जिनमें से कुछ अब आसानी से उपलब्ध भी नहीं हैं।
उन्होंने एक छोटे एक संग्रहालय का निर्माण किया था। बाद में वह जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग करते रहते थे। वह एक टीवी निर्देशक के रूप में भी कई फिल्मों से जुड़े थे। इसके अलावा उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों और मंच नाटकों की भी रचना कर डाली।
असम में शास्त्रीय सत्तारिया नृत्य के शोध में भी वे लगे रहे थे। इसकी रचना श्रीमंत शंकरदेव ने की थी। उनके निधन के बाद गुरु जतिन गोस्वामी, लोक गायक लोकनाथ गोस्वामी और गीतकार प्रशांत बोरदोलोई सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शर्मा के घर का दौरा किया और पुष्पांजलि अर्पित की।