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समय पर किए काम का फल मीठा होता है: संदीपा धर

Mon, 11 Mar 2019 01:27 AM IST
Mishra Mishra मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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संदीपा धर - फोटो : amar ujala
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राजश्री की खोज माना जाता है आपको? घर से लेकर कॉलेज तक कॉरपोरेट माहौल में पलने बढ़ने के बीच ये अभिनय का मोड़ कैसे आया?
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सही कहा आपने। मेरे पापा और मेरा भाई दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उच्च पदों पर हैं। मैं भी वैसा ही कुछ करना चाह रही थी। यूटीवी के मार्केटिंग विभाग में काम भी मिल गया था। पढ़ाई के दौरान मैं पॉकेट मनी के लिए विज्ञापन फिल्में करती थीं। राजश्री के ऑडीशन्स मैंने दे रखे थे, अममून हम लोग ऑडीशन देकर पता नहीं करते कि फिर नतीजा क्या रहा। एक दिन मेरे फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘मैं सूरज बड़जात्या बोल रहा हूं। मैं चाहता हूं कि आप राजश्री की फिल्म करें।‘ 

किसी कलाकार को किरदार में ढालने की जिम्मेदारी निर्देशक की होती है, कितना कुछ अपना देती हैं आप इन किरदारों को?
मार्केटिंग का काम हो या अभिनय का, मेरा एक फलसफा शुरू से रहा है और वह यह कि जो भी करो, उसमें डूब कर करो। अभिनय मेरी प्राथमिकता नहीं थी। लेकिन, सलमान खान जैसा सितारा देने वाला निर्देशक जब आपसे ऐसे बात करे तो आप समझ सकते हैं कि दिल में क्या कुछ घुमड़ने लगता है। मेरे घर वालों ने मुझे इस मौके को ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए इसके लिए खुद को तैयार करने को कहा। मैं हर किरदार के लिए ढेर सारा होमवर्क करती हूं और सेट पर पूरी तरह तैयार होकर पहुंचती हूं।
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वेब सीरीज अभय से पहले आपने सेवन ऑवर्स टू गो में भी एक पुलिसवाले का किरदार निभाया, असल जीवन में कभी किसी पुलिस वाले से पाला पड़ा?
हां, पड़ा ना। हुआ यूं कि मैं 15 साल की ही थी और मैंने पापा से जिद की कि मुझे ड्राइविंग सीखनी है ताकि अगले साल 16 की होने पर मैं लर्निंग लाइसेंस ले सकूं। पापा के साथ बेंगलुरू में हम गाड़ी चला रहे थे और पुलिस वाले ने पकड़ लिया। किसी तरह हम छूटे लेकिन इस घटना ने मुझे ये भी सबक सिखाया कि समय पर किए गए काम का ही फल मीठा होता है। जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है।

आपकी पैदाइश कश्मीर की है, भरतनाट्यम आपने दक्षिण भारत में सीखा और यू ट्यूब पर मेल्विन लुईस के साथ के आपके डांस वीडियो देखने वाले करोड़ों में हैं? शोहरत का क्या असर होता है आप पर?
मैं अब भी वही लड़की हूं जो अपनी पहली फिल्म करते वक्त थी। दबंग 2 हो या हीरोपंती हो, मैंने कभी स्टारडम को सिर नहीं चढ़ने दिया। मुझे पता है कि सिर्फ काम से ही आप नाम कमा सकते हैं। और, यही नाम स्थायी भी होता है। सुर्खियों में बने रहने के लिए कुछ करना मुझे नहीं आता। मुझे सिर्फ काम आता है, और वही मेरा इकलौता सिंबल है इस इंडस्ट्री में।
 
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संदीपा धर - फोटो : amar ujala
चाक पर चढ़ी मिट्टी हैं संदीपा: सौरभ वर्मा निर्देशक, 7 ऑवर्स टू गो

संदीपा से जब मैं पहली बार मिला तो मुझे लगा कि ये दुबली पतली घरेलू जैसी दिखने वाली लड़की एक एक्शन थ्रिलर में लीड रोल कैसे करेगी। लेकिन, संदीपा ने अपने खर्चे से मिक्स मार्शल आर्ट्स सीखी। वर्कशॉप्स कीं और खुद को मेरी फिल्म के किरदार नंदिनी शुक्ला के लिए तैयार किया। भाषा पर उनका कमाल का नियंत्रण हैं, जितनी साफ वह हिंदी बोलती हैं, उतनी ही असरदार उनकी अंग्रेजी है। इस सबके बावजूद किसी बात का घमंड संदीपा को नहीं है और सबसे बड़ी बात ये कि उन्हें खुद अपनी क्षमताओं का अंदाजा नहीं है। किसी निर्देशक के लिए वह चाक पर रखी मिट्टी हैं, जिससे वह अपने हिसाब से नया किरदार गढ़ सकता है।
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