कविता लंकेश ने इंटरव्यू में कहा कि 'यह डॉक्यूमेंट्री भारत में पत्रकारों के हर दिन होने वाले शारीरिक और मौखिक खतरों को उजागर करती है। पिछले पांच वर्षों में भारत में पत्रकारों पर 200 से अधिक हमले हुए, जिनमें पिछले दशक में 30 से ज्यादा की हत्या की जा चुकी है।' उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, 'हमले गंभीरता से होते हैं लेकिन उनके पीछे की मंशा मायने रखती है। ग्लोबल प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की संख्या 180 में से 150 है।' उन्होंने आगे कहा कि, ' पत्रकारों पर किए जाने वाले यह हमले दुर्भाग्य से नए नहीं हैं और न ही भारत तक सीमित हैं, लेकिन जिस स्पीड से पिछले एक दशक में हमले हुए हैं यह चिंतित करने वाली बात है।'
गौरतलब है कि गौरी लंकेश की 5 सितंबर, 2017 की रात को बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कविता लंकेश के बयान के अनुसार, डॉक्यूमेंट्री फिल्म गौरी को फ्री प्रेस अनलिमिटेड, एम्स्टर्डम द्वारा कमीशन किया गया है।
फ्री प्रेस अनलिमिटेड मिशन मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 19 के अनुसार सभी को अपनी राय और अपने आप को एक्सप्रेस करने की स्वतंत्रता का अधिकार है। इस अधिकार में बिना किसी रोक के राय रखने और किसी भी मीडिया के माध्यम से और सीमाओं की परवाह किए बिना जानकारी प्राप्त करने और प्रदान करने की स्वतंत्रता शामिल है।