प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अश्विनी चौधरी के पिता और हरियाणा के सार्वजनिक विमर्श में समता, न्याय, सच व लोकतांत्रिक मूल्यों की बुलंद आवाज माने गए चर्चित समाजसेवी डी आर चौधरी के निधन पर हिंदी सिनेमा की दिग्गज शख्सीयतों ने शोक व्यक्त किया है। डी आर चौधरी कोरोना से संक्रमित होने के बाद घर लौट आए थे लेकिन उनकी तबीयत फिर खराब हुई और इस बार उन्हें बचाया न जा सका। अंतिम समय में अश्विनी अपने पिता के पास ही थे।
हरियाणा के सिरसा जिला में राजस्थान से सटे गांव चौटाला निवासी दौलत राम चौधरी उर्फ डी आर चौधरी को हरियाणा में कांग्रेस की मुखालिफत करने वाले दबंग नेता के रूप में पहचाना जाता था। उन्होंने साप्ताहिक "पींग" का प्रकाशन शुरू कर उसके पन्नो पर भजनलाल (कांग्रेस) की भ्रष्ट व जन विरोधी सत्ता के खिलाफ निडरता व बेबाकी से लेख भी लिखे। कहा ये भी जाता है कि हरियाणी की राजनीति को बदल देने वाले महम कांड को उजागर करने और उस चुनाव को रद्द करवाने में भी डी आर चौधरी की अहम भूमिका रही।अश्विनी चौधरी को लेखनी की ताकत अपने पिता से विरासत में मिली। अश्विनी फिल्मकार बनने से पहले लंबे समय तक पत्रकार रहे हैं।उनके पिता डी आर चौधरी ने भी अखबारों में कॉलम लिखने के साथ ही हरियाणा के ताने- बाने को लेकर किताबें लिखीं।
अश्विनी चौधरी
- फोटो : सोशल मीडिया
2007 में उनकी किताब "हरियाणा एट क्रोसरॉड्स, प्रॉब्लम्स एंड प्रॉस्पेक्ट्स" प्रकाशित हुई जिसमें उन्होंने "आधुनिक समय में खाप पंचायतों की प्रासंगिकता", "हरियाणा की जातीय राजनीति", "हरियाणा में खेती के संकट" शिक्षा, औधौगिकरण, लोकलुभावन राजनीति, महिलाओं के सवाल, किसान ताकत के उभार सहित सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया।
2014 में प्रकाशित हुई "खाप पंचायतों की प्रासंगिकता" नामक किताब भी काफी चर्चित रही। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के अध्यक्ष और हरियाणा प्लानिंग बोर्ड के सदस्य जैसे अहम पदों पर रहे डी आर चौधरी के निधन पर उनके निवास रोहतक में दिन भर लोगों का तांता लगा रहा।
‘अमर उजाला’ से बात करते हुए अश्विनी चौधरी ने बताया कि उनके पिता ने मार्क्सवाद से लेकर बुद्ध तक का रास्ता ओशो दर्शन से होते हुए तय किया। वह जीवन भर कर्मकांडों के खिलाफ रहे। अपनी अंतिम इच्छा में उन्होंने यही लिखा कि उनकी अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित करने की बजाय रोहतक की किसी नहर में बहा दी जाएं। अपने अंतिम संस्कार में भी उन्होंने अपनी बेटी को जरूर शामिल रखने की बात लिखी थी। अश्विनी के पिता के निधन पर तमाम फिल्म निर्देशकों, कलाकारों व अन्य तकनीशियनों ने श्रद्धांजलि व्यक्त की है।